अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में कथित गड़बड़ी का विवाद अब देश के शीर्ष स्तर यानी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुंच गया है। भाजपा नेता रजनीश सिंह द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र के बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन और पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र अचानक अयोध्या पहुंचे। उन्होंने यहां बंद कमरे में एक गोपनीय बैठक की, जिसके बाद कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, नृपेंद्र मिश्र ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कर्ताधर्ताओं और मंदिर प्रबंधन से जुड़े बड़े अधिकारियों के साथ गहन मंथन किया। इस बैठक के एजेंडे को पूरी तरह गुप्त रखा गया और कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। बैठक खत्म करने के बाद वे दिल्ली लौट गए हैं। इस अचानक हुए दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है और कयास लगाए जा रहे हैं कि इसकी रिपोर्ट सीधे उच्च स्तर पर सौंपी जाएगी।
संतों ने कहा- आस्था का सवाल, सच सामने आना जरूरी
इस विवाद में अब अयोध्या के प्रमुख संतों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। महंत कमल नयन दास ने इस मुद्दे पर कहा कि यदि दान व्यवस्था में कहीं भी कोई कमी या हेराफेरी हुई है, तो उसकी पूरी तरह निष्पक्ष और साफ-सुथरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि मौजूदा समय में जांच करने वाली एजेंसियों की साख पर भी उंगलियां उठ रही हैं, जिससे आम जनता और भक्तों के बीच संशय बढ़ रहा है। अंततः ईश्वर सब देख रहे हैं और वही न्याय करेंगे।
दूसरी तरफ, सरयू तट पर स्थित करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की बातें सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर जो दावे और वीडियो सामने आ रहे हैं, उन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। श्रद्धालुओं के मन में पैदा हुए भ्रम को दूर करने के लिए दूध का दूध और पानी का पानी होना जरूरी है।
श्रद्धालुओं का भरोसा सबसे ऊपर: भाजपा नेता
प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाले बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम की हाई-लेवल और समयबद्ध जांच की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि अयोध्या का यह पावन मंदिर दुनिया भर के करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे को लेकर उठ रहे सवालों की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। अगर आरोप निराधार हैं तो वह भी स्पष्ट होना चाहिए, और यदि किसी ने गड़बड़ी की है तो उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि भक्तों का भरोसा हर चीज से ऊपर है।









