जयपुर। उच्चतम न्यायालय के आदेशों तथा केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों की अनुपालना में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध बालू-बजरी खनन की रोकथाम एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार ठोस व निर्णायक कदम उठा रही है। इसी क्रम में बुधवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न विभागों की अब तक की अनुपालना तथा आगामी अदालती सुनवाई की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की पालना के प्रति पूर्णतः संवेदनशील और गंभीर है। राज्य द्वारा 9 अगस्त को विस्तृत शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है और अधिकांश महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रभावी अमल सुनिश्चित कर लिया गया है।
बैठक के दौरान बताया गया कि अभयारण्य क्षेत्र में तैनात वन अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्यस्थल पर वैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत आवश्यक अधिसूचना 13 अगस्त को ही जारी की जा चुकी है। मध्य प्रदेश के मुरैना मॉडल की तर्ज पर जिला स्तर पर अंतर-विभागीय समन्वय हेतु 'ज्वाइंट एसओपी' भी लागू कर दी गई है। इस वैधानिक ढांचे को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए भौतिक निगरानी तंत्र को भी सुदृढ़ किया जा रहा है । खनन माफिया और अवैध परिवहन पर 24×7 नजर रखने हेतु हाई-मास्ट टावर, ऑप्टिकल फाइबर तथा एआई व थर्मल नाइट विजन सक्षम कैमरों की स्थापना तेजी से जारी है, वहीं शुष्क मौसम व मानसून उपरांत नदी के स्वरूप और नए मार्गों की पहचान के लिए जिला कलेक्टरों द्वारा नियमित ड्रोन सर्वे भी सुनिश्चित किया जा रहा है। तकनीकी निगरानी के साथ-साथ मौके पर मानवीय सुरक्षा घेरा भी मजबूत किया गया है। धौलपुर, सवाई माधोपुर, बूंदी, करौली और कोटा जिलों में कुल 40 अत्यधिक संवेदनशील स्थलों की पहचान कर, फ्रंटलाइन वन अमले की सुरक्षा एवं अवैध गतिविधियों को मौके पर रोकने हेतु इन स्थलों पर 5-5 सशस्त्र होमगार्ड जवानों की तैनाती के लिए बजट स्वीकृत व आवंटित किया जा चुका है। इससे प्रशासनिक निगरानी को भी संबल मिला है। संबंधित जिला कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं और उपखंड स्तर पर राजस्व, पुलिस, वन एवं खनन विभाग की संयुक्त टीमें सप्ताह में दो बार जीपीएस लोकेशन तथा बॉडी-वॉर्न कैमरों के साथ आकस्मिक निरीक्षण कर रही हैं।
रोकथाम के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान की दिशा में भी कार्य हो रहा है। बालू के वैध विकल्प को बढ़ावा देने के लिए एम-सैंड यूनिट्स की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई है तथा अभयारण्य सीमा के अंतर्गत आने वाले राजस्व क्षेत्रों को वन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने की संभावनाओं के परीक्षण हेतु जिला स्तरीय कमेटियों का गठन किया गया है। जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए डीओआईटी के माध्यम से एआई-एनालिटिक्स युक्त ऑनलाइन पब्लिक डैशबोर्ड और 'राजस्थान संपर्क (181)' पोर्टल पर क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिससे आमजन गोपनीय रूप से जियो-टैग्ड फोटो-वीडियो सहित शिकायत दर्ज करा सकेंगे। मुख्य सचिव ने संबंधित जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुनवाई से पूर्व निरंतर गतिविधियों का 31 अगस्त तक का अद्यतन डाटा, जब्त वाहनों-मशीनरी का विवरण तथा विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की स्थिति शीघ्र संकलित कर प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चंबल अभयारण्य की जैव विविधता, घड़ियालों एवं जलीय जीवों के प्राकृतिक वास के संरक्षण के लिए जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और न्यायालय के सभी निर्देशों की अक्षरशः अनुपालना सुनिश्चित की जाएगी।
प्रभावी निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन
उच्चतम न्यायालय के आदेशों की समयबद्ध अनुपालना एवं अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय ‘राज्य स्तरीय समन्वय एवं निगरानी समिति’ का गठन किया गया है। समिति में खान, वन, गृह, राजस्व, वित्त, परिवहन एवं आईटी विभाग के उच्चाधिकारियों सहित संबंधित 5 जिलों के जिला कलेक्टर सदस्य बनाए गए हैं तथा मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक इसके सदस्य सचिव होंगे। यह समिति अवैध खनन की रोकथाम, प्रवर्तन कार्रवाइयों, सर्विलांस सिस्टम एवं मासिक प्रगति रिपोर्ट की नियमित समीक्षा कर आवश्यक नीतिगत निर्देश जारी करेगी। बैठक में खान,वन एवं पर्यावरण, गृह,वित्त,राजस्व, परिवहन, कानून,कार्मिक विभाग,सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित उच्चाधिकारी प्रत्यक्ष रूप से तथा संबंधित जिलों के जिला कलेक्टर,पुलिस अधीक्षक,मुख्य वन संरक्षक एवं उप वन संरक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।









