NH-30 पर विकास की रफ्तार थमी, अनुमति और टेंडर के बाद भी काम बंद

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बस्तर: छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल बस्तर संभाग को देश के अन्य राज्यों और मुख्य शहरों से जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण सड़क यानी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) आज विकास के दावों की पोल खोल रही है। कई सालों तक शासन-प्रशासन के पास इस सड़क के खस्ताहाल होने का एक रटा-रटाया बहाना था कि यह मार्ग 'कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान' (कांगेर वैली नेशनल पार्क) के कोर एरिया से होकर गुजरता है, जिसके कारण पर्यावरण और वन विभाग से सड़क चौड़ीकरण की आवश्यक कानूनी अनुमति नहीं मिल पा रही है।

लेकिन अब, जब पर्यावरण मंत्रालय से सभी प्रकार की हरी झंडी मिल चुकी है, विभाग द्वारा बकायदा करोड़ों रुपये का टेंडर (निविदा) जारी कर ठेकेदार का चयन भी किया जा चुका है, और वित्तीय स्वीकृति की सभी फाइलें पूरी हो चुकी हैं, तब भी जमीनी स्तर पर काम शुरू न होना बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक है। इसका सीधा खामियाजा यह हो रहा है कि बस्तर की जीवनरेखा मानी जाने वाली इस मुख्य सड़क पर हर दूसरे दिन मीलों लंबा चक्काजाम लग रहा है। रही-सही कसर इस साल की मूसलाधार मानसूनी बारिश ने पूरी कर दी है, जिसने सड़क के हालात को बदतर से बदतर बना दिया है।

सरकारी खजाने से 15 करोड़ रुपये वन विभाग को ट्रांसफर, फिर भी कछुआ चाल से चल रही फाइलें

बस्तर संभाग की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ माना जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-30 अब यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रह गया है। विशेष रूप से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर आने वाले करीब छह किलोमीटर के हिस्से ने वाहन चालकों का जीना मुहाल कर दिया है:

  • कीचड़ का साम्राज्य: वर्तमान में हो रही लगातार बारिश के कारण यह पूरा छह किलोमीटर का हिस्सा घुटनों तक कीचड़ में डूब चुका है, जहाँ बड़े-बड़े ट्रकों और बसों के पहिए धंस रहे हैं।

  • गहरे और जानलेवा गड्ढे: हाईवे पर जगह-जगह इतने विशालकाय गड्ढे बन चुके हैं कि उनमें छोटी गाड़ियां पूरी की पूरी समा जाएं। संकरा रास्ता होने के कारण यदि एक भी भारी वाहन इन गड्ढों में फंसता है, तो दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं।

  • प्रशासनिक कागजी कार्रवाई पूरी: स्थानीय निवासियों और जनप्रतिधियों ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद जब चौड़ीकरण का रास्ता साफ हुआ, तो लोक निर्माण विभाग (PWD) ने वन विभाग को पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में लगभग 15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि भी अग्रिम जमा करा दी थी। इसके अलावा, सड़क निर्माण के लिए करीब 6.5 करोड़ रुपये का मुख्य टेंडर भी एक निर्माण एजेंसी को आवंटित कर दिया गया। लेकिन बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि जब सारे प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय रोड़े दूर हो चुके हैं, तो ठेकेदार ने अब तक सड़क पर एक गिट्टी भी क्यों नहीं गिराई है।

डामर की किल्लत का बहाना बनाकर ठेकेदार ने खड़े किए हाथ; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

अंदरूनी सूत्रों और विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, टेंडर हासिल करने वाले ठेकेदार ने अब एक नया पैंतरा अपना लिया है। वह अब बाजार में डामर (बिटुमिन) की भारी कमी और मानसूनी सीजन का हवाला देकर निर्माण कार्य को लगातार आगे टाल रहा है। ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की इस जुगलबंदी और लापरवाही की सबसे भारी कीमत यहाँ के स्थानीय ग्रामीणों, एम्बुलेंस में तड़पते मरीजों और रोजाना माल ढुलाई करने वाले ट्रक ड्राइवरों को चुकानी पड़ रही है। घंटों जाम में फंसे रहने के कारण लोगों का समय और पैसा तो बर्बाद हो ही रहा है, साथ ही इस मार्ग पर सफर करना बेहद जोखिम भरा और जानलेवा हो चुका है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी जगदलपुर और सुकमा के स्थानीय नागरिकों ने इस मार्ग की खस्ताहाली को लेकर एक उग्र जनआंदोलन किया था और चक्काजाम कर दिया था। उस वक्त जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जल्द से जल्द पक्की सड़क बनवाने का लिखित भरोसा देकर आंदोलन शांत कराया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति सुधरने के बजाय और ज्यादा नारकीय हो चुकी है।

बस्तर की जनता का सवाल- आखिर जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद से कब जागेंगे?

अब बस्तर संभाग की जनता सीधे तौर पर सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों से जवाब मांग रही है कि आखिर उन्हें इस नारकीय सफर, कमरतोड़ गड्ढों और हर दिन के मानसिक तनाव से मुक्ति कब मिलेगी? जब बजट स्वीकृत है, टेंडर पास है और पैसा भी जमा हो चुका है, तो फिर काम शुरू न होना कहीं न कहीं भ्रष्टाचार या फिर भारी प्रशासनिक लचरता की ओर इशारा करता है।

अब देखना यह होगा कि विभागीय मंत्री और कलेक्टर इस मामले में कब कड़ा संज्ञान लेते हैं और कामचोर ठेकेदार के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। हर दिन की जा रही यह देरी न केवल विकास की रफ्तार को रोक रही है, बल्कि बस्तर की जनता को कीचड़, हादसों और बड़े दुर्घटनाओं के साये में जीने को मजबूर कर रही है।