चुनावी तैयारी: देवरिया में सीएम योगी अचानक पहुंचे ब्राह्मण नेता के घर

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देवरिया। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियों का दौर जैसे-जैसे तेज हो रहा है, राजनीतिक मुलाकातें और समीकरणों का सिलसिला भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक ऐसी ही अचानक हुई मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री ने देवरिया में एक जनसभा के बाद गोरखपुर पहुंचने से पहले देवरिया के पूर्व सांसद, लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के आवास पर उनसे भेंट की। यह मुलाकात न केवल राजनीतिक विश्लेषकों बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है, जिसमें लोग इसके गहरे निहितार्थ ढूंढ रहे हैं।
इस मुलाकात को राजनीतिक विशेषज्ञ भाजपा के ब्राह्मण समाज को साधने के एक अहम संदेश के तौर पर देख रहे हैं। यह ऐसे समय में हुई है जब प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर एक बड़ा ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में है, जिसकी रणनीतियों को हाल ही में अखिलेश यादव की उपस्थिति में लखनऊ में अंतिम रूप दिया गया था। श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी का परिवार पूर्वांचल, विशेषकर देवरिया के ब्राह्मण समाज में कई पीढ़ियों से गहरी प्रतिष्ठा रखता है। लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने राजनीति में कदम रखा और 1996 तथा 1999 में देवरिया से भाजपा के सांसद चुने गए। उन्हें देवरिया से भाजपा के पहले सांसद होने का गौरव प्राप्त है, जो इस परिवार के राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है। भाजपा के सामने 2027 में देवरिया में अपना ही इतिहास दोहराने की चुनौती है। पार्टी ने 2022 में जिले की सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था। 2017 में भी देवरिया ने 7 में से 6 सीटें भाजपा की झोली में डाली थीं, तब एकमात्र भाटपाररानी की सीट उसके खाते में नहीं आई थी, लेकिन 2022 में भाजपा के सभाकुंवर ने समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले भाटपाररानी में भी कमल खिलाकर यह कसक पूरी कर दी। 2017 और 2022 में भाजपा को मिली इस भारी जीत में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका अहम रही है। ऐसे में सीएम योगी की इस मुलाकात को ब्राह्मण समाज के भीतर भाजपा के प्रति किसी भी तरह की असहजता को दूर करने और उनका समर्थन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हाल के दिनों में ब्राह्मण समाज और भाजपा को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं, यहां तक कि भाजपा के ब्राह्मण विधायकों के बाटी चोखा सहभोज ने भी कुछ असहजता पैदा की थी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को भी नसीहत व नोटिस देनी पड़ी थी।