रायपुर पुलिस कमिश्नरेट का विस्तार, शहर से लगे 6 थाने जोड़ने की तैयारी

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रायपुर राजधानी रायपुर में लागू पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था का दायरा बढ़ाने की कवायद अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) में कई दौर की बैठकों के बाद शासन को नया प्रस्ताव भेज दिया गया है। इस प्रस्ताव के तहत शहर से लगे छह प्रमुख थानों को कमिश्नरेट में शामिल करने का सुझाव दिया गया है, हालांकि पीएचक्यू की उच्चस्तरीय कमेटी ने इससे भी आगे बढ़कर पूरे रायपुर जिले को ही पुलिस कमिश्नरेट के दायरे में लाने की ठोस अनुशंसा की है। इस संबंध में अंतिम और मोहर लगाने का अधिकार अब शासन स्तर पर है, और चर्चा है कि कमिश्नरेट की नई सीमाओं को लेकर आदेश इसी सप्ताह जारी किए जा सकते हैं।

कमिश्नरेट विस्तार के दायरे में आ सकते हैं ये क्षेत्र

भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार, जिन छह थानों को कमिश्नरेट में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है, उनमें विधानसभा, माना कैंप, मंदिरहसौद, धरसींवा, अभनपुर और अधिसूचना में शामिल नवा रायपुर का नया थाना शामिल हैं। इस बदलाव के बाद कमिश्नरेट की भौगोलिक सीमाएं राजधानी से लगे बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाकों तक विस्तारित हो जाएंगी। वर्तमान में रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था इसी साल 23 जनवरी से लागू की गई थी, जिसमें शुरुआत में 21 थाने शामिल थे, जबकि रायपुर ग्रामीण को अलग रखा गया था।

पूरे जिले को कमिश्नरेट बनाने के पीछे के कारण

पुलिस मुख्यालय की उच्चस्तरीय कमेटी का मानना है कि रायपुर ग्रामीण को कमिश्नरेट से अलग रखने के कारण पिछले सात महीनों में पुलिसिंग के साथ-साथ प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर भी कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आई हैं। वर्तमान व्यवस्था में एयरपोर्ट, मंत्रालय-सचिवालय, नवा रायपुर, तूता का धरना-प्रदर्शन स्थल और राजधानी का विशाल औद्योगिक क्षेत्र ग्रामीण पुलिस के अधीन आता है, जिससे शहरी और ग्रामीण पुलिस के बीच समन्वय बिठाने में परेशानियां हो रही हैं। पूरे जिले को कमिश्नरेट के दायरे में लाने पर लगभग 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है, जिसके मद्देनजर गृह विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में संभावित व्यय का ब्योरा देने के साथ जॉइंट कमिश्नरी व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया है।

दुर्ग और बिलासपुर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं

राज्य के अन्य बड़े शहरों जैसे दुर्ग और बिलासपुर में भी पुलिस कमिश्नरेट लागू करने की चर्चाएं जोरों पर थीं, लेकिन फिलहाल इन दोनों शहरों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। उच्च स्तर से प्राप्त संकेतों के अनुसार, अभी वहां कमिश्नरेट व्यवस्था लागू करने का कोई इरादा नहीं है क्योंकि वर्तमान में सरकार का पूरा फोकस रायपुर कमिश्नरेट की सीमाओं के विस्तार और व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने पर है।

बदल सकती है रेंज आईजी की भूमिका

यदि शासन स्तर पर पूरे रायपुर जिले को कमिश्नरेट के अधीन लाने का बड़ा निर्णय लिया जाता है, तो रायपुर रेंज आईजी के प्रशासनिक स्वरूप और जिम्मेदारियों में भी बदलाव होना तय माना जा रहा है। वर्तमान में रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा के पास रायपुर ग्रामीण के अलावा गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों की जिम्मेदारी है। हालांकि, इतिहास में रायपुर रेंज के तहत दो आईजी की व्यवस्था भी रह चुकी है, जिसमें एक अधिकारी के पास केवल रायपुर जिले की कमान होती थी। ऐसे में, यदि भविष्य में रेंज आईजी के अधिकार क्षेत्र को चार जिलों तक सीमित किया जाता है, तो यह पुलिस प्रशासन के लिए कोई नया प्रयोग नहीं होगा।