पूर्व OSD लोकेश शर्मा का बड़ा हमला, बोले- अब अशोक गहलोत की जेब फट गई है

0
5

जयपुर। राजस्थान के राजनीतिक हलकों में 'जादूगर' के उपनाम से चर्चित पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस समय अपनी ही पार्टी के भीतर गंभीर अंतर्विरोधों का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव न लड़ पाने के पीछे 'साजिश' होने के उनके हालिया बयान पर अब उनके पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने कड़ा पलटवार किया है। लोकेश शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री का यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन है और उनके खिलाफ किसी ने कोई षड्यंत्र नहीं रचा था। असल में, वे खुद दिल्ली जाने से कतरा रहे थे और राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते थे।

दिल्ली जाने का डर और मुख्यमंत्री की कुर्सी का मोह

पूर्व ओएसडी ने एक साक्षात्कार में इस बात का खुलासा किया कि जब कांग्रेस आलाकमान ने अशोक गहलोत को संगठन के सर्वोच्च पद यानी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने का मन बना लिया था, तब गहलोत खुद इस दायित्व से पीछे हट रहे थे। अंदरूनी बातचीत के दौरान वे अक्सर यह बात दोहराते थे कि उन्हें दिल्ली का राजनीतिक ढांचा और वहां का सिस्टम समझ नहीं आता है और वे राजस्थान में ही रहकर काम करने के इच्छुक हैं। लोकेश शर्मा के अनुसार, गहलोत को सबसे बड़ा भय यह था कि यदि वे दिल्ली स्थानांतरित हो गए और प्रदेश की कमान किसी अन्य नेता के हाथों में चली गई, तो उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की समीक्षा या जांच शुरू हो सकती है। इसी आशंका के चलते वे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में जाने से बचते रहे।

दबाव की राजनीति और आलाकमान को सीधी चुनौती

लोकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री हमेशा दबाव की सियासत करने के आदी रहे हैं और 25 सितंबर 2022 को जयपुर में हुआ पूरा घटनाक्रम इसी रणनीति का हिस्सा था। उस वक्त दिल्ली से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन बतौर पर्यवेक्षक विधायक दल की बैठक लेने जयपुर पहुंचे थे, लेकिन आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए एक समानांतर माहौल तैयार किया गया। रणनीति के तहत विधायक मुख्यमंत्री आवास पर तय बैठक में जाने के बजाय एक अन्य मंत्री के घर पर एकत्र हुए और फिर विधानसभा अध्यक्ष को सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य यह था कि दिल्ली से आए पर्यवेक्षक विधायकों से अकेले में व्यक्तिगत संवाद न कर सकें, जो सीधे तौर पर केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती देने जैसा था।

हताशा का दौर और पकड़ कमजोर होने की छटपटाहट

पूर्व ओएसडी ने गहलोत द्वारा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर साजिश रचने का आरोप लगाने को बेहद निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इतिहास में किसी भी बड़े पदाधिकारी या मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया है। शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि यदि वे खुद को इतने बड़े जननेता समझते हैं, तो उन्हें दल से अलग होकर अपनी वास्तविक राजनैतिक ताकत का आकलन करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अब आलाकमान को इस पूरे घटनाक्रम की असलियत का भान हो चुका है, जिसके कारण उनसे संवाद बंद कर दिया गया है। गहलोत के ताजा बयान उनकी इसी राजनीतिक हताशा और गुस्से को दर्शाते हैं, क्योंकि पिछले चार दशकों से राज्य की कांग्रेस पर उनका जो एकछत्र नियंत्रण था, वह अब उनके हाथों से रेत की तरह लगातार फिसलता जा रहा है।