जयपुर। प्रांतीय राजधानी के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक चार मंजिला नूरानी मस्जिद पर सोमवार सुबह प्रशासन का कड़ा कानूनी शिकंजा कसा है। सुबह करीब सात बजे से ही भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच सरकारी बुलडोजरों ने इस बहुमंजिला ढांचे को ढहाने की कार्रवाई शुरू कर दी। कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए समूचे क्षेत्र को भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ छावनी में तब्दील कर दिया गया है। शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार के तनाव को रोकने के लिए जयपुर शहर में आधी रात से ही इंटरनेट सेवाओं को अगले 24 घंटों के लिए पूरी तरह ठप कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पूरे महानगर क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी है। बताया जा रहा है कि इस बड़ी कार्रवाई से ठीक पहले रविवार रात ईशा की अंतिम नमाज के बाद मस्जिद में ताला लगा दिया गया था, जिसके चलते सोमवार सुबह ध्वस्तीकरण के समय वहां कोई भी स्थानीय व्यक्ति मौजूद नहीं था। हालांकि, मस्जिद प्रबंधन समिति और कांग्रेस के दो स्थानीय विधायकों ने इस प्रशासनिक कदम पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह एकतरफा और मनमाना करार दिया है।
यातायात सुगमता और सड़क चौड़ीकरण के लिए चल रहा प्रशासनिक अभियान
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई का मुख्य आधार शहर के मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण करना और यातायात को सुगम बनाना है। इस मास्टर प्लान के तहत सड़क सीमा में आ रहे अन्य वाणिज्यिक और आवासीय अवैध निर्माणों को पहले ही हटाया जा चुका था। इसी अभियान के अगले चरण में आज नूरानी मस्जिद के साथ-साथ एक मजार, एक सत्संग भवन और दो अन्य छोटे मंदिरों के ढांचों को भी हटाने की कार्ययोजना तय की गई है। इस कार्रवाई के विरोध में रविवार शाम को मुस्लिम मुसाफिर खाने में समाज के लोगों द्वारा सामूहिक प्रार्थना (दुआ) का आयोजन भी किया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण करीब 45 वर्ष पूर्व साल 1981 में किया गया था। वर्तमान में कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मुख्य स्थल के आसपास के करीब आधा किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया है और आमजन सहित मीडियाकर्मियों को भी घटनाक्रम से 300 मीटर दूर रोक दिया गया है।
जमीन के स्वामित्व को लेकर प्राधिकरण और मस्जिद कमेटी के अपने-अपने दावे
इस पूरे विवाद की जड़ जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी हुई है। कार्रवाई को अंजाम दे रहे जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) का स्पष्ट रुख है कि इस चार मंजिला इमारत का निर्माण सरकारी लीज की जमीन पर पूरी तरह अवैध रूप से किया गया था, जिसे हटाना वैधानिक रूप से आवश्यक था। दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए दलील दी है कि उन्होंने साल 1981 में तत्कालीन गृह निर्माण सहकारी समिति (हाउसिंग सोसाइटी) से उचित नियमानुसार जमीन खरीदकर ही इस भवन का निर्माण कराया था। फिलहाल, दावों-प्रतिदावों के बीच मौके पर भारी संख्या में जेसीबी और पोकलेन मशीनें तैनात हैं और यह पूरी कार्रवाई शाम तक निरंतर जारी रहने की उम्मीद जताई गई है।
ड्रोन कैमरों से सख्त निगरानी और भ्रामक अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी चेतावनी
क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। रविवार को ही शहर के संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में सुरक्षाबलों द्वारा फ्लैग मार्च निकालकर नागरिकों से शांति की अपील की गई थी। पुलिस कमिश्नरेट ने साफ तौर पर चेतावनी जारी की है कि यदि किसी भी असामाजिक तत्व ने इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से भ्रामक खबरें या अफवाहें फैलाने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए साइबर सेल द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की चौबीसों घंटे कड़ाई से मॉनिटरिंग की जा रही है और पूरे मालवीय नगर क्षेत्र की गतिविधियों पर आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए पैनी नजर रखी जा रही है। अभी तक की पूरी विध्वंस प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रही है।









