सुकमा: सुकमा जिले की पुनपल्ली ग्राम पंचायत की ग्राम सभा ने एक बड़ा प्रस्ताव पारित करते हुए ईसाई और धर्मांतरित व्यक्तियों को शव दफनाने, चर्च के निर्माण, प्रार्थना सभाओं तथा अन्य किसी भी प्रकार की चर्च से जुड़ी गतिविधियों के लिए ग्राम सभा की जमीन देने से साफ इनकार कर दिया है। अपनी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का हवाला देते हुए यह कड़ा कदम उठाया गया है। ग्राम पंचायत भवन के आधिकारिक सूचना पटल पर इस निर्णय का उल्लेख करते हुए विशेष रूप से पादरियों और ईसाई धर्म प्रचारकों के गांव के भीतर प्रवेश पर भी पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है।
ग्राम सभा ने संविधान और पेसा कानूनों का दिया हवाला
यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव गत तीन अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इस निर्णय को आम जनता के बीच सार्वजनिक करने के लिए पंचायत भवन परिसर में एक सूचना पटल भी लगाया गया है। इस सूचना पटल पर धर्मांतरण, प्रार्थना सभाओं और अन्य तमाम धार्मिक गतिविधियों के संचालन हेतु पादरियों तथा धर्म प्रचारकों का गांव में प्रवेश वर्जित होने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
ग्राम सभा ने अपने इस फैसले के कानूनी आधार के रूप में भारत के संविधान के अनुच्छेद 244(1), पाँचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 का हवाला दिया है। ग्राम सभा का कहना है कि गांव की मूल सांस्कृतिक पहचान, सदियों पुरानी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक विरासत को बचाए रखने के लिए यह निर्णय लिया जाना अत्यंत आवश्यक था। स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य मड़कम भीमा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकता और स्थानीय सामुदायिक हितों को पूरी तरह ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि ग्राम सभा के द्वारा लिए गए इन निर्णयों का पूरा सम्मान होना चाहिए तथा किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में देश के कानून और संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही उसका समाधान किया जाना चाहिए।
बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
इस विशेष ग्राम सभा की बैठक के दौरान सरपंच सोनमती माड़वी, ग्राम अध्यक्ष बारसे सोमा, उपसरपंच मुचकी नंदा, ग्राम पटेल बारसे पांडु, पूर्व सरपंच मीडियम जोगा, वार्ड पंच पोडियम भीमा, ग्राम पुजारी बारसे मल्ला और जनपद सदस्य मड़कम भीमा सहित क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ प्रदेश में नया कानून लागू
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में धर्मांतरण की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से अवैध धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने, उसकी गहन जाँच करने, अनुमति प्राप्त करने तथा सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पूरी प्रक्रिया और नए नियम तय कर दिए गए हैं।
धर्मांतरण के मुद्दों को लेकर लगातार बढ़ रहा है विवाद
राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पूर्व में यह बयान दिया था कि सरकार का मुख्य उद्देश्य बनाए गए कानून का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना और अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी लगाम लगाना है। छत्तीसगढ़ के बस्तर, जशपुर और रायगढ़ जैसे प्रमुख आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्थानीय आदिवासियों को ईसाई धर्म में शामिल किए जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता रहा है, जो कई स्थानों पर आपसी गुटीय संघर्ष का रूप भी ले चुका है।
दूसरी ओर, धमतरी जिले के लगभग 30 से 35 चर्चों और प्रार्थना स्थलों के बाहर केवल ईसाइयों के प्रवेश से संबंधित बोर्ड लगाए जाने का एक नया मामला भी सामने आया है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।









