सरायकेला। सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण कला के प्रख्यात साधक गुरु सुशांत महापात्र को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। भारत सरकार के संगीत नाटक अकादमी द्वारा इस सर्वोच्च सम्मान की घोषणा किए जाने के बाद से ही समूचे कला जगत और छऊ कलाकारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस घोषणा के बाद से ही देश-विदेश के कलाकारों द्वारा उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला जारी है और इसे छऊ विधा के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया जा रहा है। इस गौरवमयी पुरस्कार के लिए चुने जाने पर 79 वर्षीय छऊ गुरु सुशांत महापात्र भावुक हो उठे। उन्होंने केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि भले ही विलंब से सही, लेकिन उनकी आजीवन कला साधना और समर्पण को राष्ट्र स्तर पर सम्मान मिला है। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अंतिम सांस तक छऊ नृत्य और मुखौटा कला के संवर्धन के लिए कार्य करते रहेंगे। यह गरिमामयी राष्ट्रीय पुरस्कार देश के राष्ट्रपति द्वारा एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
बचपन से ही विरासत में मिली कला को संजोया
गुरु सुशांत महापात्र को इस अद्भुत मुखौटा निर्माण कला का हुनर अपने परिवार से विरासत के रूप में प्राप्त हुआ था। उन्होंने मात्र आठ वर्ष की अल्पायु में ही अपने ताऊजी (बड़े पिताजी) के सानिध्य में इस सूक्ष्म कला की बारीकियों को सीखना और आत्मसात करना शुरू कर दिया था। वे पिछले कई दशकों से मुखौटा बनाने की अत्यंत प्राचीन और पारंपरिक पद्धतियों को अक्षुण्ण रखते हुए इस बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी के युवाओं तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के भगीरथ कार्य में जुटे हुए हैं।
सरायकेला छऊ को मुखौटे से मिली वैश्विक पहचान
महापात्र परिवार की कई पीढ़ियां इस अनूठी मुखौटा निर्माण कला को जीवित रखने के लिए समर्पित रही हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो वर्ष 1925 में प्रसन्न कुमार महापात्र ने सरायकेला शैली के छऊ नृत्य के लिए पहला आधुनिक और भावपूर्ण मुखौटा तैयार किया था, जिसने इस लोक नृत्य को एक विशिष्ट और बेजोड़ पहचान प्रदान की। सुशांत महापात्र द्वारा तैयार किए गए कलात्मक मुखौटों की गूंज सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न महानगरों के अलावा अमेरिका, जर्मनी के बर्लिन और ऑस्ट्रिया के वियना जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इनके मुखौटों की भव्य प्रदर्शनियां लग चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
सरायकेला छऊ को सात समंदर पार तक लोकप्रिय बनाने वाले गुरु सुशांत महापात्र को पूर्व में भी कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। इसी क्रम में वर्ष 2022 में ओडिशा के पुरी में आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव "अप्सरा-2022" के मंच पर उन्हें कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए गौरवशाली ‘गुरु ब्रह्मा अवार्ड’ से नवाजा गया था। इसके अतिरिक्त भी वे कई सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं, और अब संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलना उनकी कला यात्रा का सबसे स्वर्णिम अध्याय है।









