हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश: विधायक अनुज शर्मा से जुड़े आपत्तिजनक पोस्ट तत्काल हटाए जाएं

0
6

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय विधायक और जाने-माने छत्तीसगढ़ी अभिनेता अनुज शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर चलाए जा रहे सुनियोजित ट्रोलिंग और दुष्प्रचार अभियान पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया पूरे मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए अनुज शर्मा और उनके परिवार से जुड़ी सभी मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीरें, एडिटेड वीडियो, अश्लील टिप्पणियां, कैरिकेचर तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री को इंटरनेट से तत्काल प्रभाव से हटाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही, इस तरह की अपमानजनक सामग्री को अपलोड और प्रसारित करने वाले संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स और प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आधिकारिक नोटिस जारी कर उनसे विस्तृत जवाब तलब किया गया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने याचिका क्रमांक 3836/2026 पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.सी. शर्मा ने पैरवी की, जिनका सहयोग करने के लिए अधिवक्ताओं की एक पूरी टीम मौजूद रही।

फर्जी हैंडल्स के जरिए चलाया गया था बदनाम करने का अभियान

हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में यह मुख्य रूप से कहा गया कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब जैसे तमाम बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ फर्जी हैंडल्स और अनाम अकाउंट्स के माध्यम से अनुज शर्मा को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा था।

  • उनकी पहचान और नाम का गलत इस्तेमाल कर मॉर्फ्ड वीडियो, एडिटेड तस्वीरें, अश्लील कैरिकेचर और अपमानजनक टिप्पणियां धड़ल्ले से वायरल की जा रही थीं।

  • इतना ही नहीं, उनकी लोकप्रिय फिल्मों और गानों के हिस्सों को भी जानबूझकर भ्रामक तरीके से एडिट कर प्रसारित किया गया, ताकि समाज में उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक छवि को धूमिल किया जा सके।

  • याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि यह केवल किसी प्रकार की राजनीतिक आलोचना का मामला नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और उनके परिवार की गरिमा को ठेस पहुंचाने का गंभीर प्रयास है।

व्यक्तित्व अधिकार (पर्सनैलिटी राइट्स) और निजता का हनन

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष दलील दी कि किसी भी नागरिक की तस्वीर, आवाज, पहचान और उसके व्यक्तित्व का उसकी अनुमति के बिना व्यावसायिक या अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करना उसके 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व अधिकारों) का सीधा उल्लंघन है।

  • यह कृत्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को प्रदत्त गरिमा और निजता (प्राइवेसी) के अधिकार पर भी सीधा हमला है।

  • अदालत को अवगत कराया गया कि अनुज शर्मा केवल एक जनप्रतिनिधि ही नहीं हैं, बल्कि देश के प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' सम्मान से सम्मानित जाने-माने कलाकार भी हैं।

  • उनकी लोकप्रियता और प्रतिष्ठा का अनुचित लाभ उठाने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों ने सोशल मीडिया पर केवल व्यूज, लाइक्स, क्लिक्स और राजनीतिक स्वार्थ साधने के उद्देश्य से उनकी पहचान का घोर दुरुपयोग किया है।

हाईकोर्ट के सख्त निर्देश और अनुज शर्मा की प्रतिक्रिया

मामلات की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और प्रतिवादियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अनुज शर्मा और उनके परिजनों से जुड़ी सभी आपत्तिजनक पोस्ट, मॉर्फ्ड वीडियो, एडिटेड तस्वीरें और कैरिकेचर तुरंत हटाए जाएं। इसके अलावा, ऐसे अकाउंट्स के संचालकों और कंटेंट क्रिएटर्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

इस पूरे न्यायिक घटनाक्रम और हाईकोर्ट के आदेश के बाद विधायक अनुज शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे मुख्यधारा के मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अपने क्षेत्र की जनता का हमेशा से पूर्ण सम्मान करते हैं, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी व्यक्ति और उसके परिवार की गरिमा, निजता तथा सम्मान पर अशोभनीय व अभद्र टिप्पणी करना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसी कारण उन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अंततः न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है, परंतु सोशल मीडिया की आड़ में व्यक्तिगत हमले करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जाना बेहद आवश्यक है।