बगहा में दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति को 10 साल की सजा, सास-ससुर भी दोषी

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बगहा। पश्चिम चंपारण जिले के बगहा व्यवहार न्यायालय ने दहेज प्रताड़ना और विवाहिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति, सास और ससुर को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्रा की अदालत ने बुधवार को रामनगर थाना कांड संख्या 28/2017 और सत्रवाद संख्या 290/2017 में यह फैसला सुनाया। अदालत ने पति रंजीत चौधरी को 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा दी, जबकि सास दयमंती देवी और ससुर मथुरा प्रसाद को तीन-तीन वर्ष के कारावास से दंडित किया।

– पति को 10 साल की कठोर कारावास
अदालत ने पति रंजीत चौधरी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 306 के तहत 10 वर्ष की कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 498ए के तहत तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया।  वहीं, सास दयमंती देवी और ससुर मथुरा प्रसाद को धारा 306 के तहत तीन-तीन वर्ष की कठोर कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। दोनों को धारा 498ए के तहत भी तीन-तीन वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

– 2002 में हुई थी रीना देवी की शादी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, रीना देवी की शादी वर्ष 2002 में रंजीत चौधरी के साथ हुई थी। आरोप था कि शादी के कुछ वर्षों बाद से ही उन्हें दहेज की मांग को लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। 19 जनवरी 2017 को रीना देवी के मायके वालों को सूचना मिली कि आग में जलने से उनकी मौत हो गई है। इसके बाद मृतका के पिता उपेन्द्र प्रसाद ने रामनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने अपने दामाद, समधन और समधी पर बेटी को जलाकर मार डालने का आरोप लगाया था। इसी मामले में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद मुकदमा अदालत तक पहुंचा।

– अभियोजन पक्ष ने पेश किए 10 गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों की गवाही कराई गई। इसके अलावा अदालत में दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। बचाव पक्ष की ओर से कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। लोक अभियोजक जितेन्द्र भारती के अनुसार, अदालत ने गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पति, सास और ससुर को दोषी पाया। इसके बाद अदालत ने तीनों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई।

– सात साल पुराने मामले में आया फैसला
वर्ष 2017 में दर्ज इस मामले में करीब नौ साल बाद अदालत का फैसला आया है। न्यायालय के निर्णय के बाद पति रंजीत चौधरी को सबसे अधिक 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा मिली है, जबकि सास और ससुर को तीन-तीन वर्ष के कारावास से दंडित किया गया है। अदालत के इस फैसले से दहेज प्रताड़ना और विवाहिता को आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े मामले में न्यायिक कार्रवाई पूरी हुई है।