लोहावट (फलोदी)। फलोदी जिले के लोहावट थाना क्षेत्र अंतर्गत नौसर गांव में बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय मासूम भोमाराम को 39 घंटे चले मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन के तमाम अथक प्रयासों और ग्रामीणों की अनथक दुआओं के बावजूद मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस दर्दनाक हादसे के सामने आते ही पूरे क्षेत्र में मातमी सन्नाटा पसर गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
कैसे हुआ था हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नौसर गांव निवासी पांचाराम भील के खेत में बने बोरवेल की मोटर खराब हो गई थी। मरम्मत कार्य के लिए जब पंप को बाहर निकाला गया, तो बोरवेल का मुहाना खुला छोड़ दिया गया था। गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे पास ही खेल रहा 9 वर्षीय भोमाराम अचानक पैर फिसलने से इसी खुले बोरवेल में जा गिरा। बच्चे के गिरते ही परिजनों में कोहराम मच गया और कुछ ही देर में मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए।
39 घंटे चला मैराथन और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया। यह बोरवेल करीब 1050 फीट गहरा था, जिसमें बच्चा लगभग 650 फीट की गहराई में फंसा हुआ था। बचाव कार्य के दौरान नीचे भारी चट्टानें होने, पानी भरने और लगातार मिट्टी धंसने जैसी गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ा।
परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से बोरवेल के समानांतर एक विशाल गड्ढा खोदा गया। इसके बाद सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंचने के प्रयास किए गए। इस पूरे अभियान में 150 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहे, जबकि जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक आदित्य काकड़े, संभागीय आयुक्त केएल स्वामी और आईजी सत्येंद्र सिंह लगातार मौके पर डटकर स्थिति की निगरानी कर रहे थे।
माधाराम सुथार के देशी जुगाड़ से बाहर आया मासूम
बचाव कार्य के अंतिम चरणों में जालोर के बागोड़ा निवासी माधाराम सुथार को मौके पर बुलाया गया, जो बोरवेल में गिरे बच्चों को निकालने के अपने अनूठे और सफल 'देशी जुगाड़' के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने स्थिति के अनुसार विशेष उपकरण तैयार किए, जिनकी मदद से पहले रास्ते की बाधा बने पत्थरों को बाहर निकाला गया और आखिरकार शनिवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे मासूम भोमाराम को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
बोरवेल से बाहर निकालने के तुरंत बाद मासूम को मौके पर तैयार रखी गई एम्बुलेंस के जरिए लोहावट के राजकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का मानना है कि अत्यधिक गहराई में लंबे समय तक फंसे रहने, ऑक्सीजन की कमी और सदमे के कारण मासूम ने दम तोड़ दिया था। आवश्यक चिकित्सीय और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। 39 घंटे तक जिस एक उम्मीद और प्रार्थना के साथ पूरा राजस्थान सांसें थामे बैठा था, उसके इस दुखद अंत से हर किसी की आंखें नम हैं।









