अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, फर्जी खातों से करोड़ों की धोखाधड़ी

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ऑपरेशन म्यूल हंटर: साइबर पुलिस ने ढहाया अंतरराज्यीय ठगी का साम्राज्य, 4 गिरफ्तार

जिले की साइबर पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' (1 से 30 अप्रैल) के तहत की गई इस कार्रवाई में एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो फर्जी बैंक खातों के जरिए देशभर में ठगी को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने इस मामले में बांसवाड़ा के चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

हर्ष ट्रेडिंग: ठगी की रकम का 'हब'

जांच का केंद्र 'हर्ष ट्रेडिंग' नामक एक बैंक खाता बना। पुलिस ने पाया कि यह खाता किसी व्यापार के लिए नहीं, बल्कि केवल 'मनी म्यूल' (रकम को घुमाने) के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। इस गिरोह का काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार था:

  • नाममात्र का खाताधारक: आरोपी हर्ष जोशी के नाम पर खाता खोला गया था, लेकिन इसका पूरा तकनीकी नियंत्रण गिरोह के अन्य सदस्य कर रहे थे।

  • फर्जी झांसा: लोगों को निवेश, फर्जी कॉल और लुभावने लिंक्स के जरिए जाल में फंसाया जाता था।

  • लेयरिंग तकनीक: जैसे ही पीड़ित पैसे भेजता, उसे तुरंत हर्ष ट्रेडिंग के खाते में लिया जाता और वहां से छोटे-छोटे हिस्सों में कई अन्य खातों में भेजकर या नकद निकालकर गायब कर दिया जाता।

करोड़ों का संदिग्ध लेनदेन

पुलिस जांच में इस एक ही खाते से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

  • पुष्ट शिकायतें: देश के विभिन्न राज्यों से कुल 21 शिकायतें इस खाते के खिलाफ मिलीं, जिनमें 16.40 लाख रुपये की ठगी की पुष्टि हुई।

  • संदेहास्पद ट्रांजेक्शन: संदिग्ध लेनदेन को खंगालने पर 65.70 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि का पता चला।

  • कुल आंकड़ा: इस गिरोह के माध्यम से अब तक 82 लाख रुपये से अधिक का संदिग्ध हेरफेर सामने आ चुका है।


गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल

पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर निम्नलिखित चार आरोपियों को दबोचा है:

  1. हर्ष जोशी (22) – मुख्य खाताधारक

  2. हिमांशु शर्मा (40) – गिरोह का अहम सदस्य

  3. विकास विजयवर्गीय – रणनीतिक योजनाकार

  4. अनिल बाथम (28) – तकनीकी सहायक

राष्ट्रीय स्तर पर फैला जाल

साइबर थाना प्रभारी हरिओम मीणा के मुताबिक, इस खाते में गुजरात (अहमदाबाद), महाराष्ट्र (पुणे) और तेलंगाना जैसे राज्यों से लगातार पैसा आ रहा था। यह साबित करता है कि यह गिरोह एक संगठित नेटवर्क की तरह काम कर रहा था और इसके निशाने पर देशभर के भोले-भाले लोग थे।

पुलिस की अगली कार्रवाई

फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस और अन्य बैंक खातों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच कर रही है। पुलिस का लक्ष्य इस नेटवर्क की आखिरी कड़ी तक पहुंचना और उन अन्य बैंक खातों को फ्रीज करना है जिनका उपयोग ठगी के लिए किया गया है।