अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित दानराशि में कथित हेराफेरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच दल ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा साल 2021 से लेकर वर्तमान समय तक अधिग्रहित की गई तमाम जमीनों के दस्तावेजों, बैनामों और फाइलों की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। एसआईटी इस बात का सुराग लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के पैसों का भूमि सौदों में किसी प्रकार का गलत इस्तेमाल हुआ है। इसी सिलसिले में जमीन की कीमतों, भुगतान के तरीकों और बिचौलियों की भूमिका को लेकर तीन संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ किए जाने की भी खबर है।
बाजार भाव और खरीद मूल्य में भारी अंतर की समीक्षा
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एसआईटी मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा जमीनों के बाजार मूल्य और ट्रस्ट द्वारा चुकाई गई रकम के बीच दिख रहे बड़े अंतर पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी फाइलों, ट्रस्ट के आधिकारिक अनुमोदनों, बैंक ट्रांजैक्शन के विवरणों और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जा रहा है। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर अभी तक एसआईटी या जिला प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान अथवा वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की गई है, जबकि ट्रस्ट पहले ही अपने सभी लेन-देन को पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार बता चुका है।
करोड़ों रुपये के विवादित भूमि सौदे के दावों की पड़ताल
इस जांच के दायरे में सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए वे सवाल भी शामिल हैं, जिनमें मंदिर ट्रस्ट पर बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत चुकाकर जमीन खरीदने के आरोप लगाए गए थे। इन दावों के अनुसार, करीब तीन करोड़ रुपये की वास्तविक कीमत वाली एक जमीन का सौदा कथित तौर पर लगभग 24 करोड़ रुपये में किया गया था। एसआईटी अब इन विशिष्ट आरोपों से संबंधित कागजात, सरकारी मूल्यांकन रिपोर्ट और वास्तविक भुगतान रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण कर रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके।
हाल ही में खरीदी गई 71 एकड़ जमीन के दस्तावेजों की जांच
ट्रस्ट की एक हालिया बैठक में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच मंदिर परिसर के विस्तार के लिए कुल 71 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इस पूरी जमीन को खरीदने में कुल 5 करोड़ 69 लाख 48 हजार 650 रुपये खर्च होने की बात कही गई है, जिसमें अलग-अलग आकार के भूखंडों के लिए लाखों और करोड़ों रुपये के भुगतान का ब्योरा दिया गया था। एसआईटी अब इस समयावधि के दौरान तैयार की गई सभी पत्रावलियों और रजिस्ट्री के कागजातों को अपने कब्जे में लेकर यह जांच रही है कि इन सौदों में तय नियमों का पूरी तरह पालन हुआ था या नहीं।









