अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर से जुड़े कथित वित्तीय विवादों और दानपात्र से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप के बीच राम कचहरी चारों धाम मंदिर के पीठाधीश्वर एवं सरयू नित्य आरती समिति के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास ने इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने सेवानिवृत्त इंजीनियर दीनानाथ वर्मा द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से खुद को पूरी तरह अलग और अनभिज्ञ बताते हुए कहा कि उनका इस मामले से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सरोकार नहीं है। महंत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर अस्थायी कैंप कार्यालय के सुचारू संचालन के लिए अपना परिसर पूरी तरह निःशुल्क (मुफ्त) उपलब्ध कराया था।
प्रशासन और ट्रस्ट के अनुरोध पर दिया था नवनिर्मित भवन, नहीं लिया कोई किराया
महंत शशिकांत दास ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि जब राम मंदिर निर्माण की शुरुआती प्रक्रिया चल रही थी, तब तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) अनुज झा, तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनसे संपर्क किया था। उनके विशेष आग्रह पर उन्होंने लोकहित और सेवा भाव के उद्देश्य से राम कचहरी चारों धाम मंदिर परिसर में स्थित अपना नया बना हुआ भवन ट्रस्ट के कार्यों के लिए सौंप दिया था। इस सहयोग के बदले उन्होंने कभी भी ट्रस्ट से कोई किराया, पारिश्रमिक या वित्तीय लाभ स्वीकार नहीं किया।
महंत ने आगे बताया कि कुछ समय तक कार्य संचालित होने के बाद जब इस कैंप कार्यालय को रामनिवास परिसर में स्थानांतरित (शिफ्ट) कर दिया गया, तब ट्रस्ट ने उनके भवन का उपयोग करना बंद कर दिया था। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वह शिकायतकर्ता दीनानाथ वर्मा नाम के किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं और न ही कभी उनसे कोई मुलाकात हुई है। ऐसे में निर्माण कार्यों की आड़ में हुई कथित कमीशनखोरी या वित्तीय विसंगतियों के दावों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
क्या हैं सेवानिवृत्त इंजीनियर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप?
गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर से जुड़े विवादों के बीच हाल ही में एक नया प्रशासनिक विवाद सामने आया है। मंदिर निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी से जुड़े रहे रिटायर्ड इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए एक साक्षात्कार में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगली उठाई है। इससे पूर्व टिन्नू यादव नामक व्यक्ति ने भी ट्रस्ट के एक शीर्ष पदाधिकारी पर इसी तरह के सवाल खड़े किए थे।
दीनानाथ वर्मा ने अपने दावों में आरोप लगाया है कि राम मंदिर परिसर के भीतर विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों के निर्माण के दौरान एल्युमिनियम फिटिंग का काम करने वाले एक स्थानीय ठेकेदार से कथित तौर पर 40 फीसदी कमीशन की मांग की गई थी। उनका यह भी संगीन आरोप है कि इस अवैध कमीशन की भरपाई करने के उद्देश्य से ही संबंधित कार्य का सरकारी बिल भी वास्तविक लागत से 40 प्रतिशत तक अधिक बढ़ाकर तैयार करवाया गया था। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर अयोध्या के संत समाज और प्रशासनिक गलियारों में तीखी चर्चाएं चल रही हैं।









