विराटनगर: कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अंतर्गत आने वाले ढाणी गैसकान गांव में एक मांगलिक कार्यक्रम के बाद बासी मिठाई का सेवन करना दर्जनों लोगों के लिए भारी पड़ गया। गुरुवार की रात और शुक्रवार की सुबह के बीच हुए इस घटनाक्रम में शादी की बची हुई रसमलाई खाने से करीब 50 स्कूली बच्चों सहित कुल 75 ग्रामीण फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए। अचानक इतने लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ने से पूरे गांव में कोहराम मच गया और आनन-फानन में बीमारों को नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराना पड़ा।
बासी मिठाई के वितरण से गांव में फैली बीमारी
इस घटना की शुरुआत तब हुई जब गांव में संपन्न हुए एक विवाह समारोह की बची हुई रसमलाई को ग्रामीणों और बच्चों के बीच वितरित किया गया। मिठाई का सेवन करने के कुछ ही घंटों के भीतर बच्चों को पेट में मरोड़, तेज दर्द और उल्टी की शिकायतें होने लगीं। देखते ही देखते बीमारों की संख्या बढ़ने लगी और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि गांव के लोग अपने निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से पीड़ितों को लेकर शाहपुरा तथा आंतेला के अस्पतालों की ओर दौड़ पड़े।
अस्पतालों में मची अफरा-तफरी और चिकित्सा प्रयास
अस्पतालों में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से वहां मौजूद चिकित्सा कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए, जिसके बाद अतिरिक्त बेड और दवाइयों का इंतजाम किया गया। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए सभी का प्राथमिक उपचार शुरू किया और गंभीर रूप से प्रभावित बच्चों को विशेष निगरानी में रखा गया है। हालांकि अधिकांश मरीजों की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है, लेकिन कुछ बच्चों में डिहाइड्रेशन और घबराहट की समस्या अभी भी बनी हुई है जिसका उपचार विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में चल रहा है।
प्रशासन की सक्रियता और नमूनों की जांच
सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें हरकत में आईं और गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। विभाग के अधिकारियों ने मौके से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि मिठाई में किस तरह का संक्रमण फैला था। प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी करते हुए ग्रामीणों से बासी भोजन न करने की अपील की है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।









