मनरेगा से बदली खेती की तस्वीर : खैराडीह में पक्की सिंचाई नाली बनी किसानों की जीवनरेखा

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रायपुर : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के प्रयास अब किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। बलरामपुर जिले के विकासखण्ड शंकरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत खैराडीह में निर्मित पक्की सिंचाई नाली किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है।

800 मीटर लंबी नाली से 250 एकड़ भूमि तक पहुंचा सिंचाई का पानी, किसानों की आय में बढ़ोतरी

वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनरेगा के अंतर्गत लगभग 800 मीटर लंबी पक्की सिंचाई नाली का निर्माण कराया गया। इस पहल से गांव के किसानों को अब खेतों तक समय पर और नियमित रूप से पानी उपलब्ध हो रहा है। पहले किसान बारिश पर निर्भर होकर खेती करते थे तथा नहर का पानी खेतों तक पहुंचाने के लिए अस्थायी कच्ची नालियां बनानी पड़ती थीं। हर वर्ष बारिश और टूट-फूट के कारण इन नालियों को नुकसान पहुंचता था, जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों बढ़ जाती थी।

800 मीटर लंबी नाली से 250 एकड़ भूमि तक पहुंचा सिंचाई का पानी, किसानों की आय में बढ़ोतरी

ग्रामीणों की मांग पर निर्मित पक्की नाली ने अब इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया है। वर्तमान में इस नाली के माध्यम से लगभग 200 से 250 एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है, जिससे गांव के 11 किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। खेतों तक सुचारु रूप से पानी पहुंचने से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसान अब खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन में भी खेती कर पा रहे हैं।

किसानों का कहना है कि सिंचाई सुविधा बेहतर होने से खेती की लागत घटी है और उत्पादन बढ़ा है। इससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत कराए गए इस कार्य को गांव के विकास और किसानों की समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

जिले में मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास के ऐसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसानों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।