उज्जैन। महिदपुर तहसील की अदालत ने मात्र डेढ़ लाख रुपये के कर्ज से छुटकारा पाने के लिए अपने ही मित्र की बेरहमी से हत्या करने वाले दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों अपराधियों पर कुल 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अपर सत्र न्यायाधीश ने इस जघन्य हत्याकांड के दोषी बलराम उर्फ बल्लू परिहार और सुनील परमार को हत्या की धारा में आजीवन कारावास की सजा दी है। इसके अतिरिक्त, साक्ष्य छुपाने और आर्म्स एक्ट के तहत दोनों को क्रमशः सात और पांच साल की अतिरिक्त जेल तथा जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इस पूरी वारदात में शामिल रहे एक किशोर को बाल सुधार गृह भेजा गया है।
यह पूरा मामला पैसों के लेनदेन से जुड़ा हुआ था। दोषी सुनील ने अपने दोस्त नरेंद्र सौधिया राजपूत से डेढ़ लाख रुपये उधार लिए थे। रकम वापस न करनी पड़े, इसलिए सुनील ने बलराम और एक नाबालिग को पैसों का प्रलोभन देकर नरेंद्र को रास्ते से हटाने की साजिश रची। योजना के मुताबिक, अगस्त 2023 में सुनील ने नरेंद्र को उधारी चुकाने के बहाने उज्जैन से बुलाया। इसके बाद तीनों आरोपी उसे अनाज मंडी के पीछे ले गए, जहां धारदार हथियार से उस पर हमला कर दिया गया। चीख-पुकार दबाने के लिए आरोपियों ने नरेंद्र का मुंह बंद कर दिया और उसे घसीटते हुए पानी से भरी डबरी के पास ले जाकर डुबो दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
शव को ठिकाने लगाने का खौफनाक प्रयास
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधियों ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से हथियार और मृतक का मोबाइल फोन तोड़कर पानी में फेंक दिया। इसके बाद तीनों आरोपी वहां से भागकर ढाबलीकम्मा पहुंचे, जहां उन्होंने अपने खून से सने कपड़े बदलने के बाद मोटरसाइकिल से पेट्रोल निकालकर उन्हें जलाने का प्रयास किया, लेकिन गीले होने के कारण कपड़े पूरी तरह नष्ट नहीं हो सके। अगले दिन जब बलराम दोबारा लाश देखने पहुंचा, तो शव पानी के ऊपर तैर रहा था। उसने शव को भारी पत्थरों से बांधकर दोबारा पानी में डुबो दिया। इसके बाद आरोपियों ने महिदपुर से दो बोरे खरीदे और रात के अंधेरे में लाश को पानी से निकालकर बोरे में बंद किया और मोटरसाइकिल की मदद से महुडी गांव के एक कुएं के पास खेत में फेंक कर फरार हो गए।
विशेष जांच दल ने ऐसे बेनकाब किए कातिल
इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब खेत के मालिक ने पुलिस को बोरे में एक क्षत-विक्षत शव पड़े होने की सूचना दी। मामले की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए शासन ने इसे सनसनीखेज अपराध की श्रेणी में रखा और मामले की तफ्तीश के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। पुलिस टीम ने आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों, मोबाइल टॉवर लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स का बारीकी से विश्लेषण किया। इस तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने तीनों संदिग्धों को हिरासत में लिया, जिन्होंने कड़ाई से हुई पूछताछ में अपना गुनाह कबूल कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त जले हुए कपड़े, हथियार और मृतक का क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया।
न्यायालय में तकनीकी साक्ष्यों ने दिलाई सजा
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ वैज्ञानिक और तकनीकी सबूत बेहद मजबूती के साथ पेश किए। विशेष लोक अभियोजक ने न्यायालय के समक्ष मोबाइल फोन के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR), टॉवर लोकेशन और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ीं। इन अकाट्य सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने दोनों मुख्य आरोपियों को संदेह से परे जाकर नरेंद्र की हत्या का दोषी माना। न्यायालय ने टिप्पणी की कि इस प्रकार का अपराध समाज में मानवीय रिश्तों और भरोसे का कत्ल करता है, जिसके बाद दोनों दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने का आदेश जारी कर दिया गया।








