भोपाल में 40 पासपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, एयरपोर्ट और सीपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

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भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवाने वाले एक बड़े और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। भोपाल के अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते पर बांग्लादेशी नागरिकों के नाम से 40 पासपोर्ट जारी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद यह पूरा प्रकरण अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की इमिग्रेशन शाखा के रडार पर आ चुका है।

एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर हाई अलर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर कड़ा अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि इनमें से कोई भी संदिग्ध व्यक्ति भारत में प्रवेश करने या देश छोड़कर विदेश भागने की कोशिश करता है, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित जांच एजेंसियों को दी जाए।

संदिग्धों की विदेशी यात्राओं की खंगाली जा रही कुंडली

मध्य प्रदेश एसटीएफ (STF) की अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि इस फर्जी नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्धों ने खुद को बौद्ध धर्म का अनुयायी बताकर थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जैसे देशों की यात्राएं की हैं। फिलहाल, एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन विदेश यात्राओं का असली मकसद क्या था, वहां वे किन-किन लोगों के संपर्क में थे और क्या इस गिरोह का संबंध किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक या देश-विरोधी नेटवर्क से तो नहीं है।

फर्जी दस्तावेजों का खेल और जिलों तक फैला दायरा

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह गिरोह पहले फर्जी कागजातों के आधार पर कागजी पहचान पत्र तैयार करवाता था। इन्हीं के जरिए पैन कार्ड और नगर निगम से जन्म प्रमाण पत्र बनवाए जाते थे, जिनका इस्तेमाल पासपोर्ट हासिल करने में किया जाता था। ग्वालियर के डबरा में जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, जहां 17 अलग-अलग पासपोर्ट आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले की जांच की कड़ियां अब छिंदवाड़ा और बैतूल तक पहुंच चुकी हैं, और इन चार जिलों में 70 से अधिक संदिग्ध पासपोर्ट मिलने की बात सामने आ रही है।

असम तक पहुंची एसटीएफ की जांच

गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ के बाद एसटीएफ ने अपनी जांच का दायरा मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी बढ़ा दिया है। इस सिलसिले में पांच सदस्यीय एक विशेष टीम असम भेजी गई है, जो बांग्लादेश सीमा से जुड़े नेटवर्क, इस रैकेट के कथित सरगना और स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले मददगारों की तलाश में जुटी है। एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने का यह पूरा तंत्र किस तरह से काम कर रहा था।

व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल: एक ही पते और नंबर से कैसे पास हुए आवेदन?

इस पूरे मामले ने पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया, स्थानीय पुलिस वेरिफिकेशन और ऑनलाइन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • एक ही पते से जब लगातार अलग-अलग लोगों के नाम पर पासपोर्ट के लिए आवेदन हो रहे थे, तो इस एक जैसे पते के पैटर्न को किसी ने क्यों नहीं पकड़ा?

  • ग्वालियर के डबरा में 17 अलग-अलग आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होने के बावजूद, यह स्पष्ट कॉमन लिंक शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में क्यों नहीं आया और इन आवेदनों को संदिग्ध श्रेणी में क्यों नहीं डाला गया?