सबलगढ़-वीरपुर के यात्रियों को बड़ी सौगात, MEMU ट्रेन को CM मोहन यादव दिखाएंगे हरी झंडी

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सबलगढ़। ग्वालियर-श्योपुर रेलखंड पर करीब छह वर्ष से अधिक समय से रेल सेवा की वापसी का इंतजार कर रहे स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी सौगात सामने आई है। ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज आमान परिवर्तन परियोजना के अंतर्गत कैलारस से सबलगढ़ होते हुए वीरपुर तक मेमू ट्रेन का संचालन शुरू होने जा रहा है। इस नई रेल सेवा को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

रियासतकालीन नैरोगेज का दौर और ब्रॉडगेज का नया सफर

ग्वालियर से श्योपुर के मध्य सिंधिया रियासतकाल के दौरान 15 जून 1909 को ऐतिहासिक नैरोगेज ट्रेन की शुरुआत हुई थी। लगभग 111 वर्षों तक क्षेत्र की जीवनरेखा बनी रहने के बाद 22 मार्च 2020 को इसे अमान परिवर्तन कार्य के चलते स्थगित कर दिया गया था। अब इसी मार्ग पर ब्रॉडगेज लाइन बिछने के बाद कैलारस से वीरपुर के बीच लगभग 51 किलोमीटर के नए रेल खंड पर ट्रेनों की आवाजाही पुनः बहाल हो रही है।

स्थानीय व्यापार, कृषि और आम यात्रियों को होगा बड़ा लाभ

इस मेमू ट्रेन सेवा के आरंभ होने से क्षेत्र के कृषकों, छोटे कारोबारियों और आम यात्रियों को यातायात का सुलभ व किफायती साधन प्राप्त होगा। स्थानीय किसान अपनी सब्जियों और फसलों को बेहद कम लागत में बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। साथ ही, जहां सड़क मार्ग से बस द्वारा सफर करने पर लगभग 150 रुपये तक का व्यय होता था, वहीं अब ट्रेन से यह यात्रा 40 से 50 रुपये के भीतर पूरी हो सकेगी।

चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रेल नेटवर्क का विस्तार

ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज रेल लाइन पर मेमू सेवा का दायरा चरणबद्ध ढंग से बढ़ाया गया है। सर्वप्रथम 2 अक्टूबर 2023 को ग्वालियर से सुमावली तक ट्रेन की शुरुआत हुई थी, जिसे 16 मार्च 2024 को जौरा-अलापुर और 7 अक्टूबर 2024 को कैलारस तक बढ़ा दिया गया था। अब इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सबलगढ़ और वीरपुर तक रेल कनेक्टिविटी का विस्तार किया गया है।

वर्ष 2026 तक श्योपुर तक प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य

कुल 189 किलोमीटर लंबी ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज परियोजना में से अब तक 118 किलोमीटर का ट्रैक तैयार कर 12 रेलवे स्टेशनों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। वीरपुर से श्योपुर के बीच शेष 71 किलोमीटर हिस्से पर निर्माण कार्य जारी है। लगभग 2,355 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस पूरी रेल परियोजना को 31 दिसंबर 2026 तक श्योपुर तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।