PM किसान योजना के नाम पर जमीन हड़पने का आरोप, बुजुर्ग ने सरपंच पर लगाए गंभीर आरोप

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मऊगंज: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में 80 वर्ष की उम्र में कांपते हाथों और धुंधली होती आंखों के सहारा स्वरूप बची पुश्तैनी जमीन को लेकर धोखाधड़ी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जीवनभर की जमापूंजी के रूप में बची जमीन पर सरकारी योजना का सपना दिखाकर कब्जा किए जाने के इस घटनाक्रम ने इंसानियत, जनविश्वास और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नईगढ़ी क्षेत्र के ग्राम हकरिया नंबर-1 निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग जोखू जायसवाल ने ग्राम पंचायत सरपंच तरुण शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

किसान सम्मान निधि का झांसा देकर जमीन की रजिस्ट्री कराने का आरोप

पीड़ित बुजुर्ग के अनुसार उन्हें यह कहकर गुमराह किया गया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ दिलाने के लिए कुछ जरूरी कागजातों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान की आवश्यकता है। योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में उन्होंने बिना किसी शंका के बताए गए कागजातों पर दस्तखत कर दिए। हालांकि, कुछ समय बाद जब असलियत सामने आई, तो उनके होश उड़ गए। जिन कागजों को वे योजना से जुड़े दस्तावेज समझ रहे थे, वे वास्तव में उनकी पुश्तैनी जमीन की रजिस्ट्री के कागजात निकले।

न्याय पाने प्रशासनिक चौखट पर पहुंचे पीड़ित बुजुर्ग

अपने साथ हुई इस कथित जालसाजी से आहत होकर जोखू जायसवाल ने अपर कलेक्टर पी.के. पांडे के समक्ष उपस्थित होकर एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराने, कथित फर्जी तरीके से कराई गई रजिस्ट्री को निरस्त करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का कहना है कि उन्हें अब भी शासन और प्रशासन पर पूरा भरोसा है कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी जमीन वापस लौटाई जाएगी।

सरकारी योजनाओं के नाम पर धोखाधड़ी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

इस सनसनीखेज मामले के उजागर होने के बाद समूचे ग्रामीण इलाके में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि अशिक्षा और वृद्धावस्था का लाभ उठाकर किसी बुजुर्ग के साथ ऐसा छल हो सकता है, तो इससे सरकारी योजनाओं और जनप्रतिनिधियों के प्रति आम जनता का विश्वास डगमगाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच को पारदर्शी बनाकर सच्चाई सामने लाई जाए ताकि भविष्य में कोई किसी असहाय के साथ ऐसी धोखाधड़ी न कर सके।

प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकीं क्षेत्र की निगाहें

फिलहाल पीड़ित बुजुर्ग की अर्जी मिलने के बाद मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका है। अब पूरे मऊगंज जिले की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच प्रक्रिया में क्या तथ्य निकलकर सामने आते हैं। यदि लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह ग्रामीण अंचल में सरकारी योजनाओं के नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी का एक अत्यंत गंभीर मामला साबित होगा, जिसमें कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।