भोपाल| मध्य प्रदेश के नागरिकों के लिए एक बेहद खुशी और राहत भरी खबर सामने आई है। राजधानी भोपाल से ग्वालियर के बीच की दूरी को और अधिक सुगम बनाने के लिए लगभग 320 किलोमीटर लंबे नए ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल फोरलेन कॉरिडोर को विकसित किए जाने की प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करवाने के लिए आधिकारिक तौर पर टेंडर भी जारी कर दिए हैं। इस शानदार मार्ग के बन जाने से भोपाल से ग्वालियर के बीच का सफर जो वर्तमान में करीब 7 घंटे का होता है, वह घटकर केवल 5 घंटे का रह जाएगा।
तीन संभावित अलाइनमेंट का होगा सर्वे और अध्ययन
इस परियोजना की डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान कुल तीन संभावित अलाइनमेंट का गहन सर्वे किया जाएगा, जिसके बाद ही अंतिम और सबसे बेहतर रूट का चयन किया जाएगा। इस दौरान भूमि अधिग्रहण (लैंड एक्विजिशन), बायपास, इंटरचेंज और अन्य तमाम तकनीकी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर इस प्रोजेक्ट का फाइनल ब्लूपांट तैयार किया जाएगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट रूप से तय नहीं हो पाया है कि यह नया फोरलेन मार्ग किन-किन प्रमुख शहरों, कस्बों और गांवों से होकर गुजरेगा। इस पूरे सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने के कार्य के लिए 6.23 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
12 महीने का तय किया गया है समय
राज्य सरकार की यह परियोजना पूरी तरह से 'ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर' के रूप में विकसित की जाएगी, जिसका सीधा मतलब यह है कि यह सड़क पूरी तरह से एक नए मार्ग पर बनाई जाएगी और इस पर गाड़ियों का प्रवेश तथा निकास केवल निर्धारित और तय किए गए एक्सचेंजों से ही हो सकेगा। एमपीआरडीसी ने इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने के लिए अधिकतम 12 महीने (एक साल) का समय निर्धारित किया है।
दूरी में होगी 100 किलोमीटर की भारी कमी
वर्तमान समय में भोपाल से सड़क मार्ग द्वारा ग्वालियर जाने के लिए शिवपुरी और गुना के रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जिसकी कुल दूरी लगभग 428 किलोमीटर बैठती है और इस सफर को तय करने में करीब साढ़े सात घंटे से अधिक का समय लग जाता है। अब इस नए और सीधे रूट के बन जाने से दोनों शहरों के बीच की संभावित दूरी घटकर सीधे 320 किलोमीटर रह जाएगी। इससे भोपाल और ग्वालियर के बीच की कुल दूरी में पूरे 100 किलोमीटर की बड़ी कमी आएगी, जिससे यात्रियों का कीमती समय और ईंधन दोनों की भारी बचत होगी।









