भोपाल। मध्यप्रदेश में एक तरफ जहां सरकार अवैध खनन को पूरी तरह रोकने के लिए लगातार कड़ी कार्रवाई करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ताजा मामला चंदेरी झील का है, जहां बेखौफ खनन माफिया दिन-रात अवैध रूप से खुदाई करने में जुटे हैं। यहां धड़ल्ले से पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल कर मिट्टी और कोपरा निकाला जा रहा है, जिसे खुलेआम शहरों में ले जाकर मोटी रकम में बेचा जा रहा है।
अधिकारियों की फटकार के बाद भी बुलंद हैं माफियाओं के हौसले
यह पूरा मामला अचारपुरा-डोबरा रोड पर स्थित कुठार की चंदेरी झील का है। इस लापरवाही और अवैध काम को लेकर मुख्य सचिव (सीएस) अनुराग जैन खुद कलेक्टर और कमिश्नरों को सख्त फटकार लगा चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन की नाक के नीचे माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे हर दिन करीब 50 से 60 ट्रक कोपरा निकाल रहे हैं। शासन-प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी इस अवैध कारोबार पर लगाम नहीं लग पा रही है।
गहरीकरण के नाम पर हो रहा है खेल
चंदेरी झील में चल रहे इस खेल को लेकर जब पंचायत के सरपंच और सचिवों से बात की गई, तो उनका कहना है कि सरकार के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत तालाब के गहरीकरण का काम किया जा रहा है। लेकिन असलियत इसके ठीक उलट है। माफिया सरकार के इस अभियान की आड़ लेकर गहरीकरण के नाम पर खुलेआम अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले पर न तो पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई आवाज उठाई और न ही खनिज विभाग ने कोई सुध ली। स्थानीय ग्रामीणों का तो यहां तक आरोप है कि खनिज विभाग की मौन स्वीकृति के चलते ही यह अवैध काम इतनी बेखौफ तरीके से चल रहा है।
जांच के बाद कार्रवाई का मिला भरोसा
जब इस पूरे मामले को लेकर जिला खनिज अधिकारी एमएस रावत के सामने सवाल रखे गए, तो उन्होंने साफ कहा कि उनकी जानकारी में केवल 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत झील के गहरीकरण की बात ही है। उन्होंने अवैध खनन और कोपरा बेचने की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि अगर तालाब से अवैध तरीके से कोपरा निकालकर बेचा जा रहा है, तो जल्द ही एक संयुक्त टीम बनाई जाएगी। यह टीम मौके पर जाकर पूरे मामले की जांच करेगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन बेखौफ माफियाओं पर कब और क्या एक्शन लेता है।









