जबलपुर। जिले में सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक स्तर में आई गिरावट को जिला प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। हाल ही में कक्षा 5वीं और 8वीं के परीक्षा परिणामों का विश्लेषण करने के बाद कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान शैक्षणिक कार्यों में लापरवाही बरतने और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और शिक्षकों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। समीक्षा बैठक में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं रहे हैं, जिसके आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबन और वेतन कटौती की कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर गिरी गाज
समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने पाया कि चेरीताल संकुल के जनशिक्षक प्रदीप पटेल और अलका कोरी ने अपने दायित्वों के निर्वहन में भारी अरुचि दिखाई है। इन दोनों शिक्षकों द्वारा अध्यापन कार्य और स्कूल की मॉनिटरिंग में बरती गई शिथिलता के कारण संबंधित क्षेत्रों का शैक्षणिक ग्राफ नीचे गिरा है। इसी को आधार मानते हुए कलेक्टर ने इन दोनों जनशिक्षकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के आदेश जारी किए। प्रशासन का मानना है कि शिक्षकों की शैक्षणिक कार्यों के प्रति उदासीनता ही खराब परीक्षा परिणामों का मुख्य कारण है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों के वेतन में कटौती
बैठक में केवल जमीनी स्तर के शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा गया है। कार्यों के प्रति लापरवाही बरतने पर बीआरसी नगर-1 के डीसी अहिरवार और नगर-2 के आशीष के वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट निर्देशित किया है कि खराब परीक्षा परिणामों के लिए जिम्मेदार बीआरसी को उनके पदों से हटाने का प्रस्ताव तत्काल तैयार किया जाए। प्रशासन का लक्ष्य उन अधिकारियों को चिह्नित करना है जो अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं कर पा रहे हैं।
परीक्षा परिणामों का तुलनात्मक विश्लेषण
समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि एक स्कूल का परीक्षा परिणाम मात्र 39 प्रतिशत रहा, जबकि कुंडम के शासकीय स्कूलों ने 70 से 80 प्रतिशत तक परिणाम देकर बेहतर प्रदर्शन किया है। इस अंतर को देखते हुए उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की रणनीति बनाई गई है जहाँ परिणाम औसत से कम रहे हैं। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी और जिला शिक्षा केंद्र के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन अब 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों की शालावार समीक्षा करने की तैयारी में है ताकि बोर्ड परीक्षाओं में भी जवाबदेही तय की जा सके।
स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को सुधारने के निर्देश
शैक्षणिक सुधारों के साथ-साथ कलेक्टर ने स्कूलों की भौतिक स्थिति सुधारने पर भी जोर दिया है। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी शासकीय स्कूलों में पेयजल, बिजली और प्रकाश की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा पाठ्यपुस्तकों और साइकिल वितरण की प्रक्रिया को समय सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि बेहतर शैक्षणिक माहौल और बुनियादी सुविधाएं मिलने से विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सुधार होगा। जिन स्कूलों के परिणाम कमजोर रहे हैं, वहाँ सुधार के लिए अब विशेष रणनीति के तहत कार्य किया जाएगा।









