पाटन जेल में भ्रष्टाचार का खेल? पूर्व बंदी के खुलासे से प्रशासन में हलचल

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की पाटन उप जेल इस समय विवादों के घेरे में है। सालों से एक ही जगह पर जमे जेल अधिकारियों की शह पर यहाँ बंद कैदी नियमों की धज्जियां उड़ाकर मौज-मस्ती कर रहे हैं। हालांकि, जेल प्रशासन की यह मेहरबानी मुफ्त में नहीं मिल रही है, बल्कि इसके बदले बंदियों से मोटी रकम वसूली जा रही है। यह सनसनीखेज खुलासा हाल ही में जेल से छूटकर आए एक पूर्व बंदी ने किया है। जेल से रिहा हुए इस शख्स ने आरोप लगाया है कि उप जेल के भीतर कैदियों से अवैध उगाही के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से चरम सीमा तक प्रताड़ित किया जाता है।

रसूखदारों को आराम, गरीबों को टॉर्चर; जेलर के इशारे पर चलता है गैंग

शिकायतकर्ता के मुताबिक, पाटन उप जेल में कदम रखते ही वसूली का यह घिनौना खेल शुरू हो जाता है। जो बंदी अधिकारियों की मांग के अनुसार पैसे दे देता है, उसे जेल के भीतर वीआईपी सुविधाएं और हर तरह का आराम मुहैया कराया जाता है। इसके विपरीत, जो बंदी मोटी रकम देने में असमर्थ होते हैं, उन्हें नरकीय यातनाएं दी जाती हैं। आरोप है कि जेलर हेमेंद्र बागरी और रचना चौकसे के सीधे इशारे पर जेल के भीतर एक गैंग सक्रिय है। इस गैंग में उम्रकैद की सजा काट रहे चार खतरनाक कैदी—भूरा पटेल, विष्णु, कल्लू और संतोष शामिल हैं, जिन्हें नए बंदियों को प्रताड़ित करने और उनसे पैसे वसूलने के काम पर लगाया गया है।

जेल के गेट से ही शुरू हो जाती है 'बोली'

पूर्व बंदी ने जेल के भीतर की कड़वी सच्चाई उजागर करते हुए बताया कि जैसे ही कोई नया बंदी जेल के मुख्य द्वार से अंदर दाखिल होता है, तलाशी के बहाने ही उसकी 'बोली' लगा दी जाती है। बैरक तक पहुँचने से पहले ही यह तय कर लिया जाता है कि उस बंदी से हर महीने कितनी रकम ऐंठनी है। इसके बाद, जब बंदी के परिजन उससे मुलाकात करने जेल आते हैं, तो उन तक यह गुप्त संदेश पहुंचा दिया जाता है कि अगर वे अपने आदमी को अंदर सुरक्षित और सुकून से देखना चाहते हैं, तो उन्हें हर महीने कितना 'खर्चा' (रिश्वत) भिजवाना होगा। इस अवैध कमाई को चारों रसूखदार कैदी और रचना चौकसे आपस में बांट लेते हैं।

निरीक्षण में खुली पोल: गायब मिले अफसर, बच्चा वार्ड में चल रही थी अय्याशी

इस पूरे मामले के बीच, विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम द्वारा किए गए एक औचक निरीक्षण ने जेल प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। निरीक्षण के दौरान सामने आई कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • अधिकारी नदारद: औचक जांच के दौरान जेलर और अन्य जिम्मेदार अधिकारी ड्यूटी से गायब पाए गए।

  • चाइल्ड वार्ड का दुरुपयोग: जेल के संवेदनशील 'बच्चा वार्ड' में चार रसूखदार कैदी अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए थे और आराम से टीवी देखकर लुत्फ उठा रहे थे।

  • बंदियों ने बयां किया दर्द: जांच टीम ने जब बैरकों का मुआयना किया, तो डर के साए में जी रहे बंदियों ने दबी जुबान में अधिकारियों के कानों में अफसरों के इस काले कारनामे के राज खोले।

  • मारपीट का दबाव: हाल ही में एक बंदी ने तय रकम देने से मना कर दिया था, जिसके बाद उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। हालांकि, अफसरों के खौफ और दबाव के चलते मेडिकल परीक्षण (मुलायजा) के वक्त वह बंदी मारपीट की बात स्वीकार करने से मुकर गया।