गैस नहीं, पानी से भरा सिलेंडर! इंदौर में उपभोक्ता ने एजेंसी पर लगाए गंभीर आरोप

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इंदौर: मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर से घरेलू एलपीजी (LPG) रसोई गैस सिलेंडर के वितरण और सुरक्षा मानकों को कटघरे में खड़ा करने वाला एक बेहद ही हैरान करने वाला और गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां एक उपभोक्ता को बाकायदा सील पैक सिलेंडर थमाया गया, लेकिन जब इसका उपयोग शुरू किया गया, तो गैस की जगह उसमें पानी निकलने का सनसनीखेज खुलासा हुआ।

इस घोर लापरवाही और ठगी का शिकार हुए विकास नगर निवासी राजेंद्र करोले ने इंडेन गैस डिस्ट्रीब्यूटर और स्थानीय एजेंसी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उपभोक्ता फोरम और गैस एजेंसी के चक्कर काटने के बाद भी जब पीड़ित को न्याय नहीं मिला, तो वह इस धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत के तौर पर पानी से भरा भारी-भरकम सिलेंडर खुद अपने कंधे पर उठाकर सीधे इंदौर कलेक्टर कार्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुंच गया। इस अनोखे और कड़े विरोध प्रदर्शन को देखकर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य आवेदकों के बीच हड़कंप मच गया।

अप्रैल महीने में कराया था बुक; उपयोग के दौरान चूल्हा न जलने पर खुली घटिया खेल की पोल

इंदौर: पीड़ित उपभोक्ता राजेंद्र करोले ने कलेक्ट्रेट में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे मामले का ब्योरा दिया:

  • एजेंसी से लिया था सिलेंडर: राजेंद्र के अनुसार, उन्होंने बीती गर्मियों (अप्रैल महीने) के दौरान क्षेत्र की 'श्री छाया गैस एजेंसी' से अपने नाम पर पंजीकृत इंडेन का घरेलू एलपीजी सिलेंडर रीफिल बुक कराकर प्राप्त किया था।

  • वजन था सामान्य पर गैस गायब: सिलेंडर की डिलीवरी लेते समय उसका वजन बिल्कुल सामान्य लग रहा था, जिसके कारण उन्हें शुरुआत में कोई संदेह नहीं हुआ। लेकिन कुछ दिनों बाद जब सिलेंडर को चूल्हे से जोड़ा गया, तो बर्नर से गैस के बजाय पानी का रिसाव होने लगा और चूल्हा जलना बंद हो गया। जब सिलेंडर को हिलाकर देखा गया, तो उसके भीतर गैस के लिक्विड के बजाय सामान्य पानी जैसी हलचल महसूस हुई।

गैस एजेंसी की तानाशाही: पीड़ित से ही मांग बैठे ₹700 अतिरिक्त और नया कनेक्शन लेने का दबाव

इंदौर: पीड़ित उपभोक्ता ने गैस वितरण एजेंसी के कर्मचारियों और प्रबंधकों पर सहयोग न करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का भी संगीन आरोप लगाया है:

  • मुफ्त में बदलने से इनकार: राजेंद्र करोले का आरोप है कि जब उन्होंने इस तकनीकी गड़बड़ी और पानी भरे होने की शिकायत प्रमाण के साथ गैस एजेंसी के दफ्तर में की, तो अधिकारियों ने अपनी गलती मानने के बजाय सारा दोष उपभोक्ता पर ही मढ़ दिया।

  • अवैध वसूली का प्रयास: एजेंसी प्रबंधन ने बिना अतिरिक्त शुल्क (पेनाल्टी) लिए नया और सही गैस सिलेंडर देने से साफ तौर पर मना कर दिया। उन्होंने पीड़ित से दूसरे सिलेंडर की आपूर्ति के एवज में ₹700 की अतिरिक्त गैर-कानूनी राशि की मांग की। राजेंद्र का कहना है कि गैस कनेक्शन और रिफिलिंग से जुड़े सभी वैध दस्तावेज उन्हीं के नाम पर हैं, वे हर महीने ईमानदारी से तय राशि का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद उनके साथ यह अन्याय किया गया।

कलेक्ट्रेट में दी गई निष्पक्ष जांच और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की लिखित अर्जी

इंदौर: गैस एजेंसी के अड़ियल रवैये और अभद्र व्यवहार से तंग आकर आखिरकार पीड़ित को प्रशासनिक शरण लेनी पड़ी:

  • कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग: पीड़ित उपभोक्ता राजेंद्र करोले ने इंदौर जिला प्रशासन के समक्ष अपनी गुहार लगाते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के जीवन के साथ खिलवाड़ और आर्थिक धोखाधड़ी का मामला है।

  • मुफ्त रिप्लेसमेंट की गुहार: पीड़ित ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या जुर्माने के तुरंत प्रभाव से नया और सुरक्षित रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए।

प्रशासन ने दिया त्वरित जांच का भरोसा; इंडेन गैस प्रबंधन और डीलर ने साधी चुप्पी

इंदौर: कलेक्ट्रेट में मचे इस हंगामे और पानी से भरे सिलेंडर की शिकायत के बाद प्रशासनिक अमला भी अलर्ट मोड पर आ गया है:

  • आधिकारिक चुप्पी: इस पूरे संवेदनशील घटनाक्रम और रिफिलिंग में पानी मिलाने के गंभीर आरोपों पर फिलहाल इंडेन गैस कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधन और श्री छाया गैस एजेंसी की ओर से कोई भी आधिकारिक सफाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • खाद्य विभाग करेगा जांच: दूसरी ओर, इंदौर जिला प्रशासन ने पीड़ित की लिखित शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसे पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि इस मामले को नाप-तौल विभाग और खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की संयुक्त टीम को सौंपा जा रहा है। जांच में जो भी डिस्ट्रीब्यूटर, गोडाउन कीपर या गैस एजेंसी दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लाइसेंस रद्द करने और प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।