भोपाल: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और संसद की स्थायी समिति (शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी) के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर नीट-यूजी और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों पर सरकार से एक विस्तृत 'श्वेत पत्र' (White Paper) जारी करने की पुरजोर मांग की है।
परीक्षा रद्द होने से छात्र भारी मानसिक तनाव में
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा के निरस्त होने की वजह से देश के लाखों विद्यार्थी इस समय गहरे मानसिक तनाव और असमंजस के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज छात्रों और उनके अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पूर्व में हुए पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच कहां तक पहुंची है और इस पूरे खेल के असली दोषियों के खिलाफ सरकार ने अब तक क्या सख्त कार्रवाई की है।
आधिकारिक जानकारी न होने से बढ़ा अविश्वास
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामला हो या फिर यूजीसी-नेट (UGC-NET) 2024 परीक्षा से जुड़े विवाद, इन सभी में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार की तरफ से कोई ठोस और आधिकारिक जानकारी न मिलने के कारण देश के युवाओं के बीच भ्रम, घबराहट और पूरी परीक्षा प्रणाली के प्रति अविश्वास की स्थिति पैदा हो रही है।
सरकार से पिछले 8 वर्षों का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि केंद्र सरकार पिछले आठ सालों के दौरान एनटीए (NTA) द्वारा आयोजित की गई सभी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और गड़बड़ियों का पूरा ब्योरा देश के सामने रखे। इसके साथ ही उन्होंने श्वेत पत्र में निम्नलिखित जानकारियां शामिल करने की मांग की:
हर एक मामले में अब तक की गई जांच की मौजूदा स्थिति क्या है?
इन घोटालों में कुल कितने आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं?
किन मामलों में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुकी है और कहां क्लोजर रिपोर्ट लगाई गई है?
पकड़े गए आरोपियों की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है?
युवाओं का भरोसा जीतने के लिए पारदर्शिता जरूरी
दिग्विजय सिंह ने पत्र के अंत में जोर देकर कहा कि इस समय देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है और परीक्षा व्यवस्था पर से उनका भरोसा उठ चुका है। ऐसे संकट के समय में केवल पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के जरिए ही युवाओं का विश्वास वापस जीता जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा श्वेत पत्र जारी करना छात्रों के मन में भरोसा जगाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और जरूरी कदम साबित होगा।









