भोपाल। मध्य प्रदेश में सेवारत कामगारों एवं कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण समाचार है। आगामी 1 अक्टूबर 2026 से राज्य के 24 जिलों के विशिष्ट क्षेत्रों में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के प्रावधान प्रभावी कर दिए जाएंगे। इस निर्णय के परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले पात्र कर्मचारियों तथा संबंधित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों व संस्थाओं को ईएसआईसी (ESIC) के नियमों के अनुरूप अंशदान (कंट्रीब्यूशन) करना होगा, जिसके उपरांत पात्र कार्मिक ईएसआईसी की विभिन्न कल्याणकारी सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
यह निर्णय केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 22 सितंबर 2026 को प्रेषित राजपत्रित अधिसूचना के उपरांत लिया गया है। इस अधिसूचना का मुख्य प्रयोजन उन भौगोलिक क्षेत्रों को ईएसआईसी प्रणाली के दायरे में लाना है, जहां यह व्यवस्था अब तक क्रियान्वित नहीं थी, जिससे अधिकाधिक पात्र कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा एवं चिकित्सा संबंधी संरक्षण प्रदान किया जा सके।
राज्य के इन 24 जिलों में लागू होगी नई व्यवस्था
जारी अधिसूचना के अनुसार, मध्य प्रदेश के आगर मालवा, अलीराजपुर, अनूपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, बड़वानी, बैतूल, छतरपुर, दमोह, दतिया, हरदा, झाबुआ, मंडला, नरसिंहपुर, पन्ना, राजगढ़, सिवनी, श्योपुर, शिवपुरी, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया, विदिशा, डिंडोरी और निवाड़ी जिलों के निर्धारित औद्योगिक व शहरी क्षेत्रों में ईएसआईसी का कार्यक्षेत्र विस्तारित किया जाएगा।
1 अक्टूबर 2026 से क्या परिवर्तन होगा?
दिनांक 1 अक्टूबर 2026 से इस अधिसूचना के क्षेत्राधिकार में आने वाले समस्त संस्थानों के नियोक्ताओं और कर्मचारियों को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के विधिक प्रावधानों के तहत अंशदान जमा करना होगा। यद्यपि, प्रत्येक कर्मचारी स्वतः ही इस योजना के अंतर्गत नहीं आएगा; किसी भी कार्मिक पर इस नियम की प्रयोज्यता संबंधित संस्थान के स्वरूप, कर्मचारी की पात्रता तथा अधिसूचना में वर्णित शर्तों पर निर्भर करेगी।
कर्मचारियों को प्राप्त होने वाले प्रमुख लाभ
चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य सुरक्षा: ईएसआईसी के दायरे में सम्मिलित होने वाले पात्र कर्मचारियों तथा उनके आश्रित परिजनों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं एवं चिकित्सीय सुविधाएं सुलभ हो सकेंगी।
सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: निगम द्वारा निर्धारित अन्य सामाजिक सुरक्षा का लाभ भी कार्मिकों को प्राप्त होगा।
अंशदान की अनिवार्यता: इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए संबंधित कर्मचारी एवं संस्था को निर्धारित नियमों के अनुसार नियमित रूप से अंशदान करना अनिवार्य होगा।









