ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी. नरहरि के नाम का सहारा लेकर धोखाधड़ी करने का एक मामला सामने आया है। जल संसाधन (सिंचाई) विभाग के एक सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) को सस्ता फर्नीचर बेचने का झांसा देकर 1.56 लाख रुपये की ठगी की गई है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कॉल डिटेल व बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
ग्वालियर के मुरार थाना अंतर्गत कल्पना नगर निवासी 71 वर्षीय सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता मैथिली शरण गुप्ता के साथ यह ठगी हुई। जानकारी के अनुसार, 18 सितंबर को उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, जो आईएएस पी. नरहरि के नाम से बनाई गई फर्जी आईडी से भेजी गई थी। गुप्ता ने परिचित अधिकारी का नाम देखकर उसे स्वीकार कर लिया। इसके पश्चात जालसाज ने उनसे मोबाइल नंबर प्राप्त किया और खुद को सीआरपीएफ कमांडेंट सुमित कुमार का परिचित बताते हुए एक नंबर साझा किया।
फर्नीचर बेचने के बहाने ठगी
साइबर ठग ने पीड़ित को बताया कि सुमित कुमार का स्थानांतरण हो गया है और वे अपना प्रयुक्त फर्नीचर बेचना चाहते हैं। व्हाट्सएप पर भेजी गई तस्वीरों को देखकर सौदा 95 हजार रुपये में तय हुआ, जिसे पीड़ित ने 21 सितंबर को ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद आरोपी ने सामान परिवहन और अन्य प्रक्रियाओं का हवाला देकर 61,500 रुपये अतिरिक्त जमा करवा लिए। जब आरोपी ने तीसरी बार 8,800 रुपये और मांगे, तब पीड़ित को ठगी का संदेह हुआ और उन्होंने तत्काल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
कौन हैं आईएएस पी. नरहरि?
पी. नरहरि वर्ष 2001 बैच के वरिष्ठ प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। वे मूल रूप से तेलंगाना के करीमनगर के निवासी हैं और वर्तमान में भूमि संसाधन विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। मध्य प्रदेश में लाडली लक्ष्मी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी प्रमुख भूमिका मानी जाती है। वे सिवनी, सिंगरौली, ग्वालियर और इंदौर जैसे प्रमुख जिलों में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।







