‘रिटायरमेंट से पहले सरकारी पर्यटन’, बैंगलुरू गए अधिकारियों पर जीतू पटवारी का तंज

0
7

भोपाल: मध्य प्रदेश में कृषि विभाग के अधिकारियों को प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण के लिए बेंगलुरु भेजने के फैसले पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर करारा तंज कसा है।

सेवानिवृत्ति के नजदीक अधिकारियों के चयन पर विवाद

कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि प्राकृतिक खेती का ज्ञान जमीन पर किसानों तक कब पहुंचेगा, यह किसी को नहीं पता, लेकिन सरकारी खर्च पर अधिकारियों की ट्रेनिंग का इंतजाम तय समय पर हो रहा है। उन्होंने खास तौर पर उन अधिकारियों को इस सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है, जो कुछ ही दिनों या महीनों में रिटायर होने वाले हैं। उदाहरण के तौर पर, सूची में शामिल सहायक संचालक सविता श्रीवास्तव का कार्यकाल 30 सितंबर को और अपर संचालक जीपी प्रजापति का 31 दिसंबर को समाप्त होने वाला है। कांग्रेस ने इसे 'सरकारी पर्यटन' करार दिया है।

प्रशिक्षण का पूरा कार्यक्रम और रूपरेखा

कृषि विभाग द्वारा बनाई गई योजना के तहत प्राकृतिक खेती की तीन दिवसीय आवासीय ट्रेनिंग के लिए अधिकारियों के कुल पांच बैच तैयार किए गए हैं।

  • अवधि: पहला बैच आज यानी 16 सितंबर से शुरू हो रहा है, और अन्य बैच नवंबर के पहले पखवाड़े तक चलेंगे।

  • शामिल अधिकारी: इसमें अपर संचालक से लेकर स्टेट कोऑर्डिनेटर और संचालनालय के बजट, स्थापना, व कानूनी मामलों से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं।

  • प्रशिक्षण संस्था: बेंगलुरु स्थित 'श्रीश्री इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेस एंड टेक्नोलॉजी' द्वारा यह ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें खेती के तौर-तरीकों के साथ योग और ध्यान को भी जोड़ा गया है।

लागत और वित्तीय अनुमान

इस पूरे आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संस्था द्वारा ठहरने और ट्रेनिंग का खर्च तय किया गया है। अनुमान के मुताबिक, एक सिंगल बैच पर लगभग चार से साढ़े चार लाख रुपये का खर्च आएगा, जिसमें यात्रा भत्ता (TA-DA) का खर्च अलग से जोड़ा जाएगा। इन्हीं सब बिंदुओं को लेकर विपक्ष सरकार के वित्तीय प्रबंधन और इस ट्रेनिंग के औचित्य पर लगातार सवाल उठा रहा है।