उज्जैन: जिले के खाचरोद कस्बे से एक ऐसी रहस्यमयी बैंक चोरी का मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। गल्ला मंडी के सामने स्थित जिला सहकारी बैंक में रविवार की रात हुई इस वारदात ने 'अपराध' की पारंपरिक परिभाषा को ही बदल कर रख दिया। आमतौर पर बैंक में घुसने वाले लुटेरों का पहला और आखिरी निशाना तिजोरी होती है, लेकिन यहाँ चोरों ने लॉकर में रखे 85 लाख रुपए को छुआ तक नहीं। उनका पूरा ध्यान केवल बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड और कंप्यूटर सिस्टम पर था, जहाँ से वे महत्वपूर्ण डेटा वाला सीपीयू (CPU) उखाड़कर ले गए।
सुरक्षा तंत्र पर प्रहार और डेटा की चोरी
खाचरोद के इस सहकारी बैंक में घुसे नकाबपोशों ने सबसे पहले मुख्य चैनल गेट का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया। अंदर कदम रखते ही उन्होंने किसी पेशेवर अपराधी की तरह सबसे पहले सीसीटीवी कैमरों के तारों को काटा और तकनीकी उपकरणों को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस को हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी रकम हाथ के पास होने के बावजूद चोरों ने केवल सीपीयू और सीसीटीवी के रिकॉर्डिंग बॉक्स (DVR) को प्राथमिकता दी। इस विचित्र व्यवहार ने उज्जैन पुलिस को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यह सामान्य चोरी नहीं, बल्कि बैंक के गोपनीय डेटा को हासिल करने की कोई बड़ी साजिश हो सकती है, जिसका उपयोग भविष्य में किसी बड़े वित्तीय घोटाले के लिए किया जा सकता है।
85 लाख सुरक्षित और साक्ष्यों का अभाव
बैंक प्रबंधन और पुलिस जब मौके पर पहुँचे, तो उन्होंने पाया कि लॉकर और नकदी पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन साक्ष्यों को पूरी तरह मिटा दिया गया है। कैमरों का डीवीआर गायब होने के कारण पुलिस के पास चोरों का कोई फुटेज उपलब्ध नहीं है, जिससे उनकी पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी हुए सीपीयू में किस प्रकार की संवेदनशील जानकारी—जैसे कि ग्राहकों के पिन, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री या फिक्स्ड डिपॉजिट का डेटा—मौजूद था। बिना किसी डिजिटल सुराग के यह उज्जैन बैंक चोरी फिलहाल एक अबूझ पहेली बनी हुई है।
अंदरूनी मिलीभगत और सुनियोजित साजिश
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जिस सफाई से डीवीआर और सीपीयू को निशाना बनाया गया, वह बिना किसी 'इनसाइडर' जानकारी के संभव नहीं है। संदेह के घेरे में बैंक के कुछ कर्मचारी भी हैं, क्योंकि यह बात सामने आई है कि रविवार की छुट्टी के बावजूद एक कर्मचारी शाम के समय बैंक आया था। पुलिस अब इस पहलू की जांच कर रही है कि क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति ने चोरों को सुरक्षा प्रणाली और कंप्यूटर सर्वर की सटीक जानकारी उपलब्ध कराई थी। खाचरोद पुलिस आसपास के इलाकों के निजी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ-साथ स्टाफ के कॉल रिकॉर्ड्स की भी गहन पड़ताल कर रही है ताकि इस डिजिटल डकैती के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया जा सके।








