भोपाल। मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग ने प्रशासनिक अनुशासन को कड़ा करते हुए अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके तहत अब विभाग के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को विभागीय मंत्री तुलसीराम सिलावट से मुलाकात करने से पूर्व औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
बिना अनुमति मंत्री से मिलने पहुंचे तो होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय की ओर से प्रदेश के सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जारी आदेश में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी भविष्य में बिना पूर्वानुमति के मंत्री से मिलने पहुंचता है, तो इसे पदीय शिष्टाचार का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
15 सितंबर को जारी पत्र का दिया गया हवाला
विभाग द्वारा जारी इस आधिकारिक पत्र में 15 सितंबर को जल संसाधन मंत्री की ओर से प्राप्त निर्देशों का उल्लेख किया गया है। पत्र में कहा गया है कि पूर्व में कई अधिकारी और कर्मचारी बिना किसी पूर्व स्वीकृति या आधिकारिक प्रक्रिया का पालन किए सीधे मंत्री से भेंट करने उपस्थित हो जाते हैं, जो विभागीय कार्यप्रणाली और शासकीय शिष्टाचार के सर्वथा विपरीत है।
अधीनस्थ कार्यालयों तक निर्देश प्रसारित करने के आदेश
प्रमुख अभियंता कार्यालय ने सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी अधीनस्थ कार्यालयों और मैदानी अमले को इन नियमों से तत्काल अवगत कराएं। इस आदेश के लागू होने के बाद अब विभाग में पदस्थ समस्त अमले को मंत्री से मुलाकात के लिए तयशुदा प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना होगा।









