जबलपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ विधायक संजय पाठक से जुड़े एक मानहानि मामले में शुक्रवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई टल गई। यह मामला जैसे ही जस्टिस विशाल मिश्रा की ग्रीष्मकालीन अवकाश (समर वेकेशन) पीठ के सामने आया, उन्होंने बिना किसी लंबी बहस के खुद को इस केस की सुनवाई से अलग करने का फैसला कर लिया। न्यायालय ने नया आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि इस प्रकरण को आगामी सप्ताह किसी ऐसी दूसरी बेंच के समक्ष पेश किया जाए, जिसका हिस्सा वे स्वयं न हों।
एक करोड़ रुपये का मानहानि का दावा और पुलिस की चुप्पी
यह पूरा विवाद कटनी के रहने वाले पूर्व आर्म्स डीलर नाजिम खान द्वारा दायर की गई एक याचिका से संबद्ध है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अक्टूबर 2025 में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक साक्षात्कार के दौरान विधायक संजय पाठक ने उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और बेबुनियाद बातें कही थीं। विधायक ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि नाजिम खान की दुकान से 14 हजार कारतूस गायब हैं और वहां से गैरकानूनी हथियारों की खरीद-बिक्री की जाती है। इन बयानों को अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ बताते हुए पूर्व आर्म्स डीलर ने एक करोड़ रुपये की मानहानि का दावा ठोका है। उनका कहना है कि इस मामले में कई बार पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन राजनीतिक रसूख के कारण जब कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो उन्हें न्याय के लिए हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
पहले भी विधायक की वजह से सुनवाई छोड़ चुके हैं न्यायाधीश
यह कोई पहला मौका नहीं है जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने विधायक संजय पाठक से संबंधित किसी केस की सुनवाई करने से इनकार किया हो। इससे पहले सितंबर 2025 में अवैध उत्खनन (माइनिंग) से जुड़े एक अन्य संवेदनशील मामले में भी उन्होंने खुद को सुनवाई से दूर कर लिया था। उस वक्त न्यायाधीश ने अपने आधिकारिक आदेश में बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए लिखा था कि संबंधित विधायक द्वारा मामले को प्रभावित करने के उद्देश्य से उनसे सीधे फोन पर संपर्क साधने का प्रयास किया गया था।
न्यायालय की आपराधिक अवमानना का मुकदमा भी है लंबित
न्यायाधीश से संपर्क करने की इस गंभीर कोशिश को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा पर चोट मानते हुए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया था। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए भाजपा विधायक संजय पाठक के विरुद्ध अदालत की आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट) का मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत की साख से जुड़ा यह महत्वपूर्ण अवमानना मामला फिलहाल उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।









