त्विषा केस में नया मोड़: परिवार ने कोर्ट में दायर किए दो आवेदन, जांच की मांग तेज

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भोपाल। बहुचर्चित त्विषा शर्मा मृत्यु मामले में एक नया मोड़ आ गया है, जिसने इस पूरे प्रकरण पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिवारवालों की तरफ से निचली अदालत में दो पृथक-पृथक प्रार्थना पत्र दाखिल कर मामले के कुछ अनछुए कड़ियों की बारीकी से तफ्तीश कराने का आग्रह किया गया है। परिजनों का आरोप है कि इस केस में सरकारी कानूनी सहायता (लीगल एड) विभाग से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और वकीलों की भूमिका संदिग्ध रही है, जिसकी गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है। पीड़ित पक्ष के वकील अंकुर पांडे द्वारा न्यायालय के समक्ष पेश किए गए आवेदन में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि मामले की मुख्य नामजद आरोपी गिरिबाला सिंह को शुरुआत से ही विधिक सहायता तंत्र से जुड़े कुछ प्रभावशालियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग मिलता रहा। याचिका में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का साक्ष्य देते हुए आरोप लगाया गया है कि आरोपी और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की एक महिला पदाधिकारी के बीच लगातार फोन पर चर्चा हुई थी। इसमें विशेष रूप से 12 मई की आधी रात को हुई एक बेहद लंबी बातचीत का भी विवरण दिया गया है।

परिजनों ने अपनी अर्जी में यह बात भी रेखांकित की है कि आगामी 15 मई को जब आरोपी महिला की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई चल रही थी, तब अधिवक्ता श्रेयस सक्सेना ने उसके पक्ष में दलीलें पेश की थीं। इसके साथ ही यह गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि श्रेयस सक्सेना और रीना वर्मा ने मिलकर आरोपी महिला का वकालतनामा कोर्ट में पेश किया, जबकि ये दोनों ही वकील सरकारी विधिक सहायता प्रणाली से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस परिस्थिति को आधार बनाकर मृतका के परिजनों ने मुफ्त कानूनी सहायता देने वाली इस पूरी व्यवस्था की प्रामाणिकता और उसकी पारदर्शिता पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।

हितों के टकराव और निष्पक्षता पर उठते सवाल

पीड़ित परिवार ने अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों में कुछ ऐसे सबूत और तस्वीरें भी अटैच की हैं, जो त्विषा शर्मा की शादी के समय के बताए जा रहे हैं। इन तस्वीरों और वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए परिवार ने दावा किया है कि इसमें अधिवक्ता श्रेयस सक्सेना और इस मामले के सह-आरोपी समर्थ सिंह के बीच काफी करीबी व व्यक्तिगत संबंध साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। परिजनों ने कानूनी दलील देते हुए कहा है कि यदि इन दोनों के बीच यह निजी रिश्ता कोर्ट में सिद्ध हो जाता है, तो यह पूरी तरह से 'हितों के टकराव' (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का एक बड़ा उदाहरण होगा। ऐसी स्थिति में सरकारी विधिक सहायता योजना की निष्पक्षता पूरी तरह से संदेहास्पद हो जाती है।

सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध व्यक्ति की जांच की मांग

परिवार द्वारा दायर किए गए दूसरे आवेदन में अदालत से एक अज्ञात शख्स की शिनाख्त कराने की पुरजोर मांग की गई है। इस अर्जी में उल्लेख किया गया है कि घटना से ठीक पहले एक ब्यूटी पार्लर के सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति देखा गया था। अचरज की बात यह है कि वही व्यक्ति बाद में त्विषा शर्मा के विवाह कार्यक्रम के वीडियो और तस्वीरों में भी कई जगह पर उपस्थित दिखाई दे रहा है। पीड़ित पक्ष ने माननीय न्यायालय से गुहार लगाई है कि इस रहस्यमयी व्यक्ति की असल पहचान उजागर की जाए और इस पूरे मौत प्रकरण में उसकी क्या संलिप्तता थी, इसकी भी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। फिलहाल अदालत में इस मामले पर कानूनी बहस चल रही है और इन गंभीर आरोपों पर प्रतिवादी पक्ष की प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है।