मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, मुक्तिधाम पर मिलेगी सुविधा

0
5

भोपाल। मध्य प्रदेश में अब आम जनता को मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा फैसला लेते हुए निर्देश दिए हैं कि अब मुक्तिधाम और विश्राम घाटों पर ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था की जाए। सरकार के इस कदम से शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और सर्टिफिकेट पाने की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जन्म और मृत्यु पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्था को सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे विश्राम घाटों या मुक्तिधामों में ही प्रमाण पत्र जारी करने की एक प्रभावी कार्ययोजना (ब्लूप्रिंट) तैयार करें। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी कार्रवाई को सरल बनाना है ताकि परिजनों को दुख की घड़ी में प्रशासनिक दफ्तरों में परेशान न होना पड़े।

स्वतंत्रता दिवस पर होगा विकास कार्यों का सोशल ऑडिट

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के सभी जिलों में विकास कार्यों का 'सोशल ऑडिट' कराया जाएगा। इसके लिए सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों की विकास रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। खास बात यह है कि विकास का पैमाना (इंडेक्स) जिलों की स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर तय होगा। औद्योगिक, कृषि प्रधान और वन संपदा वाले क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मानक (स्टैंडर्ड) निर्धारित किए जाएंगे।

जानें, वर्तमान में कैसे बनता है मृत्यु प्रमाण पत्र

मध्य प्रदेश में फिलहाल मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की एक तय कानूनी प्रक्रिया है:

  • समय-सीमा और आवेदन: मृत्यु होने के 21 दिनों के भीतर नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद या संबंधित ग्राम पंचायत में पंजीकरण के लिए आवेदन करना होता है।

  • ऑनलाइन प्रक्रिया: इसके लिए आवेदक को 'MP e-District' की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है, जहाँ ‘Application for Death Certificate’ का विकल्प चुनना पड़ता है।

  • जरूरी दस्तावेज और शुल्क: आवेदन के लिए अस्पताल से मिलने वाली 'डेथ डिटेल' और मृतक के पहचान संबंधी विवरण (जैसे वोटर आईडी, राशन कार्ड आदि) की आवश्यकता होती है। निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद एक ट्रैकिंग नंबर जनरेट होता है, जिससे सर्टिफिकेट का स्टेटस जाना जा सकता है।