मानसून विदा होने के बाद भी बरसेंगे बादल, MP में अगले 3 दिन बारिश का दौर

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भोपाल। मध्य प्रदेश से भले ही मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है, लेकिन बादलों और बारिश का सिलसिला अभी पूरी तरह थमा नहीं है। चक्रवाती परिसंचरण के सक्रिय होने के कारण राज्य के पूर्वी हिस्से में मौसम का मिजाज बदला हुआ है और आगामी तीन दिनों तक इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना जताई गई है।

इन जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार

मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पूर्वी संभागों में बादलों की आवाजाही और रिमझिम का दौर जारी है। जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के अंतर्गत आने वाले लगभग 16 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर आंधी चलने की संभावना है। इनमें जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडोरी, अनूपपुर, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। यह मौसमी गतिविधियां 8 और 9 अक्टूबर को भी बनी रह सकती हैं, जबकि 10 अक्टूबर से सिस्टम के कमजोर पड़ने के बाद मौसम साफ होने की उम्मीद है।

दिन में तेज धूप और रातों में महसूस होने लगी ठंडक

राज्य के पश्चिमी हिस्से में मौसम का रूप बिल्कुल अलग है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में दिन के समय तीखी धूप खिल रही है, जिससे गर्मी का अहसास हो रहा है। हालांकि, रात होते ही तापमान में गिरावट आने लगी है और हल्की ठंडक बढ़ने लगी है। बीती रात कई शहरों में न्यूनतम पारा 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया, जिसमें इंदौर में 17.2 डिग्री, पचमढ़ी में 18 डिग्री और छिंदवाड़ा में 18.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं दूसरी ओर, ग्वालियर जैसे शहरों में दिन का अधिकतम तापमान अभी भी 37 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है।

मानसून सीजन का हाल और बारिश का असमान वितरण

इस वर्ष मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 24 जून को दाखिल हुआ था और 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से विदा हो गया। लगभग 100 दिन तक सक्रिय रहने के बावजूद इस बार कुल बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम दर्ज की गई। पूरे सीजन में 908.4 मिलीमीटर (35.8 इंच) बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर का था। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक पानी गिरा, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जून महीने में हुई 14 प्रतिशत कम बारिश की भरपाई पूरे सीजन में नहीं हो सकी, हालांकि जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों ने स्थिति को काफी हद तक संभाल लिया था। राज्य के 25 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो चुका है, जबकि 30 जिले अभी भी इससे पीछे हैं।