सिंहस्थ यात्रा गाइड: उज्जैन में 8 प्रमुख स्थल जिन्हें मिस न करें

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इंदौर:  उज्जैन में होने वाले 'सिंहस्थ 2028' के भव्य और ऐतिहासिक आयोजन को लेकर तैयारियां अब केवल उज्जैन तक सीमित नहीं हैं। इस महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए इंदौर, ओंकारेश्वर, महेश्वर और खंडवा में भी विकास कार्यों की रफ्तार बेहद तेज हो गई है। यह धार्मिक मेला पूरे मालवा-निमाड़ अंचल के पर्यटन क्षेत्र को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित होगा, जिसमें इंदौर शहर सबसे बड़े सहयोगी केंद्र के रूप में उभरेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग इस पूरे क्षेत्र में करोड़ों रुपए की लागत से कायाकल्प करने जा रहा है। इन परियोजनाओं के लिए सरकारी बजट के साथ-साथ सीएसआर फंड (CSR) और आम जनता का सहयोग भी लिया जा रहा है। विभाग ने इन सभी प्रमुख विकास कार्यों को साल 2027 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।

खजराना गणेश मंदिर का द्वार होगा 10 फीट चौड़ा

सिंहस्थ में आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। भक्तों को बप्पा के सुगम और नजदीक से दर्शन कराने के लिए गर्भगृह के मुख्य प्रवेश द्वार को 10 फीट चौड़ा करने का निर्णय लिया गया है। इस जीर्णोद्धार के लिए मुख्य द्वार के ढांचे पर मढ़ी हुई करीब 150 किलो (डेढ़ क्विंटल) चांदी को सुरक्षित निकाल लिया गया है। निर्माण के दौरान मूल ढांचे की मजबूती परखने के लिए एसजीएसआईटीएस (SGSITS) की इंजीनियरिंग टीम ने विशेष तकनीकी टेस्टिंग भी की है। द्वार चौड़ा होने से वीआईपी और आम श्रद्धालुओं की कतारें समानांतर रूप से आसानी से आगे बढ़ सकेंगी और भक्तों को दूर से ही बप्पा के स्पष्ट दर्शन होंगे।

सात करोड़ की लागत से आकार ले रहा 'रणजीत लोक'

इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित अतिप्राचीन श्री रणजीत हनुमान मंदिर जल्द ही एक भव्य और नए स्वरूप में श्रद्धालुओं के सामने होगा। यहां तैयार किए जा रहे 'रणजीत लोक' का काम काफी तेजी से चल रहा है। सात करोड़ रुपये की भारी लागत से बन रहा यह रणजीत लोक अगले डेढ़ साल में भक्तों के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत 25 फीट चौड़ा सुंदर पाथवे, हनुमान जी के सुंदरकांड के प्रसंगों को दर्शाती भव्य दीवारें और अत्याधुनिक जनसुविधाएं बनाई जा रही हैं, जिसका लाभ भक्तों को सिंहस्थ शुरू होने से पहले ही मिलने लगेगा।

राजबाड़ा और लाल बाग पैलेस का जीर्णोद्धार

इंदौर की ऐतिहासिक पहचान राजबाड़ा स्थित 'दरबार हॉल' के संरक्षण और विकास की कमान भी सिंहस्थ मद को सौंपी गई है। उज्जैन आने वाले अधिकतर पर्यटक इंदौर के राजबाड़ा को देखने जरूर आते हैं। इस योजना के तहत पुरानी ऐतिहासिक संरचना को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए हॉल का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जिसे इस साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही, इंदौर के प्रसिद्ध लाल बाग पैलेस में भी आधुनिकीकरण और नई बाउंड्री वॉल के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इस पूरे राजसी परिसर का काम भी इसी साल संपन्न कर लिया जाएगा।

ठहरने के लिए बन रही हैं हाईटेक व्यवस्थाएं

बाहर से आने वाले पर्यटकों को बेहतर आवास सुविधाएं देने के लिए महेश्वर स्थित 'नर्मदा रिसॉर्ट' का नवीनीकरण सीधे पर्यटन विभाग द्वारा कराया जा रहा है। इसके साथ ही इंदौर जिले के 'चोरल रिसॉर्ट' को भी नए सिरे से चमकाया जा रहा है, जिसे बाद में पीपीपी मोड (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर संचालित किया जाएगा। इन दोनों रिसॉर्ट्स को इस प्रकार अपग्रेड किया जा रहा है जिससे विदेशों से आने वाले वीआईपी मेहमान भी विश्वस्तरीय सुविधाओं का आनंद ले सकें। वहीं, पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में भी पचास करोड़ रुपये के भारी निवेश से पीपीपी मोड पर एक नए अंतरराष्ट्रीय स्तर के होटल का निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है।

महेश्वर में 'अहिल्या लोक' का भव्य निर्माण

अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए मशहूर महेश्वर नगरी में सिंहस्थ मद के अंतर्गत 'अहिल्या लोक' का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। साइट पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और अहिल्याबाई होल्कर के गौरवशाली इतिहास को समेटने वाले इस भव्य लोक को पूरा करने की अंतिम समय सीमा साल 2027 तय की गई है।

ओंकारेश्वर परिक्रमा पथ और शंकराचार्य गुफा का संरक्षण

पवित्र धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में परिक्रमा पथ के चौड़ीकरण और विकास का काम तेजी से चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि यह काम साल 2027 की शुरुआत तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही आदिगुरु शंकराचार्य की ऐतिहासिक गुफा के मूल स्वरूप को सहेजने का काम भी इसी बजट से किया जा रहा है, जो अगले दो महीनों में बनकर तैयार हो जाएगा। ओंकारेश्वर परिक्रमा पथ के तहत मुख्य रास्तों को चौड़ा करना, सुंदर फ्लोरिंग बिछाना, श्रद्धालुओं के लिए शेड का निर्माण, आकर्षक स्वागत द्वार और कई नए व्यू पॉइंट्स बनाना शामिल है।

संत सिंगाजी समाधि स्थल का होगा विकास

खंडवा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र 'संत सिंगाजी समाधि स्थल' (पिपल्या माफी) के विकास कार्यों को जनवरी 2027 तक पूरा करने की समय सीमा दी गई है। मालवा-निमाड़ अंचल के निवासियों के लिए यह बेहद गहरी आस्था का केंद्र है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु मत्था टेकने पहुंचते हैं। इस पवित्र स्थल पर सरकार, जनसहयोग और विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के सीएसआर (CSR) फंड से करोड़ों रुपए जुटाकर विकास कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।

बदलेगी पूरे मालवा अंचल के पर्यटन की तस्वीर

ट्रेवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चैप्टर के चेयरमैन हेमेंद्र सिंह जादौन के मुताबिक, सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के इस त्रिकोण (टूरिस्ट सर्किट) के बीच यात्रा करेंगे। मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन उद्योग के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक अवसर साबित होने वाला है। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि सिंहस्थ में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उनका सफर पूरी तरह से आरामदायक बना रहे। इसी दूरगामी सोच को ध्यान में रखकर इन सभी विकास योजनाओं का खाका खींचा गया है।