अशोकनगर: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से एक महिला सब-इंस्पेक्टर का भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस वायरल वीडियो में महिला अधिकारी अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जिक्र करते हुए रोती हुई नजर आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि जिले के वर्तमान पुलिस अधीक्षक (SP) राजीव कुमार मिश्रा ने पिछले 5 महीनों से उनका वेतन रोक रखा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कार दुर्घटना के बाद से स्पाइन की समस्या से हैं ग्रस्त
पीड़ित महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) पूजा रघुवंशी का कहना है कि एक भीषण कार दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) में फ्रैक्चर हो गया था, जिसके बाद वे काफी समय तक बेड रेस्ट पर थीं। कुछ समय राहत रहने के बाद पिछले 7-8 महीनों से उन्हें पुनः स्पाइन में अत्यधिक असहनीय दर्द शुरू हो गया। गंभीर स्वास्थ्यगत परिस्थितियों के कारण वे विगत 5-6 महीनों से चिकित्सकीय अवकाश (मेडिकल लीव) पर हैं और लगातार डॉक्टरों से इलाज करा रही हैं।
'5 से 6 बार पीएचक्यू के काट चुकी हूं चक्कर'
महिला अधिकारी ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे अपनी इस शारीरिक समस्या को लेकर जिले के पुलिस अधीक्षक से लेकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) के वरिष्ठ अधिकारियों तक गुहार लगा चुकी हैं। अपनी इस स्थिति में भी वे 5 से 6 बार पुलिस मुख्यालय का दौरा कर वरिष्ठ अधिकारियों से अपनी समस्या हल करने का निवेदन कर चुकी हैं।
फील्ड ड्यूटी के बजाय ऑफिस ड्यूटी दिए जाने की मांग
एसआई पूजा रघुवंशी ने स्पष्ट किया कि वे कभी भी अपनी कर्तव्य निष्ठा से पीछे नहीं हटी हैं और आज भी पूर्ण ईमानदारी से सेवा देना चाहती हैं। हालांकि, अपनी वर्तमान चिकित्सीय स्थिति और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उन्होंने मांग की है कि जब तक उनकी रीढ़ की हड्डी का दर्द ठीक नहीं हो जाता, तब तक उन्हें फील्ड ड्यूटी के बजाय किसी ऑफिस में पदस्थ किया जाए। उन्होंने अंदेशा जताया कि यदि समय पर राहत नहीं मिली, तो वे स्थायी रूप से अशक्त हो सकती हैं।
'छोटे बच्चों के कारण सुसाइड भी नहीं कर सकती'
अपनी आर्थिक तंगी और प्रशासनिक उपेक्षा पर आक्रोश जताते हुए महिला सब-इंस्पेक्टर ने कहा कि 5 महीने से वेतन न मिलने के कारण स्थितियां अत्यंत विकट हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में ही लोग आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि, उन्होंने भावुक होते हुए जोड़ा कि अपने छोटे-छोटे बच्चों की जिम्मेदारी के कारण वे ऐसा कदम भी नहीं उठा सकती हैं। उन्होंने शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष न्याय देने की मांग की है।









