खंडवा: प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में नगर परिषद की घोर प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक तीन वर्षीय मासूम बालक की अकाल मृत्यु हो गई। महाराष्ट्र के नागपुर से अपने परिवार के साथ भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करने आए कैलाश उसराठे का तीन साल का बेटा ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में खुले पड़े एक गहरे सेप्टिक टैंक में गिर गया। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के पश्चात नगर परिषद द्वारा सुरक्षा का कोई प्रबंध न करते हुए टैंक को खुला ही छोड़ दिया गया था, जो अंधेरे के कारण बालक को दिखाई नहीं दिया। इस दुखद हादसे के बाद धार्मिक नगरी में भारी शोक और आक्रोश व्याप्त है।
बेटे को बचाने के लिए पिता ने सेप्टिक टैंक में लगाई छलांग
अपने मासूम बच्चे को गंदे पानी से भरे गड्ढे में गिरता देख पिता कैलाश उसराठे ने बिना एक क्षण गंवाए अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत टैंक में छलांग लगा दी। भारी जद्दोजहद के बाद उन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े को टैंक से बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक मासूम की सांस नलियों और फेफड़ों में अत्यधिक गंदा पानी भर चुका था। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए खंडवा के अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में उपचार के दौरान मासूम ने तोड़ा दम
खंडवा अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टरों की टीम ने बालक को बचाने का हर संभव प्रयास किया, किंतु फेफड़ों में पानी भर जाने से उसकी हालत बिगड़ती चली गई। कई घंटों तक चले गहन उपचार के बाद भी मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी और उसने दम तोड़ दिया। दर्शन के उत्साह में आए परिवार पर इस हादसे से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
अतिक्रमण हटाओ मुहिम के बाद सुरक्षा मानकों की अनदेखी
यह दुखद घटनाक्रम नगर परिषद की अक्षम्य लापरवाही को बेनकाब करता है। ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के बाद प्रशासन ने खुले पड़े टैंकों को ढंकने या वहां चेतावनी बोर्ड लगाने की कोई व्यवस्था नहीं की थी। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले मार्ग पर इस प्रकार खुले गड्ढे छोड़ देना सीधे तौर पर आम जनमानस और श्रद्धालुओं की जान के साथ खिलवाड़ साबित हुआ है।
प्रशासनिक सुस्ती पर स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं का गुस्सा
हादसे की खबर फैलते ही स्थानीय नागरिकों और तीर्थयात्रियों में नगर परिषद तथा स्थानीय प्रशासन के खिलाफ भारी रोष देखने को मिल रहा है। लोगों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही संपूर्ण ओंकारेश्वर क्षेत्र में मौजूद सभी खुले टैंकों, मैनहोलों और गड्ढों को तुरंत स्थायी रूप से ढंकने का कार्य पूरा किया जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।









