सिंहस्थ की तैयारी में जुटा उज्जैन, शहर को मिल रही नई सड़कों और सुविधाओं की सौगात

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उज्जैन। वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले भव्य सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाले इस धार्मिक समागम में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सुविधा के लिए धार्मिक नगरी के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक रूप दिया जा रहा है।

25 हजार करोड़ रुपये की बुनियादी विकास परियोजनाएं

सिंहस्थ 2028 की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ₹25,000 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस महायोजना के तहत उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क, घाट, पुल तथा रेल सुविधाओं का बड़े पैमाने पर कायाकल्प किया जा रहा है।

प्रमुख अधोसंरचना एवं विकास कार्य:

  • पुलों का निर्माण व चौड़ीकरण: आवागमन को सुगम बनाने के लिए ₹853 करोड़ से अधिक की लागत से 22 नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही चामुंडा माता चौराहे से फ्रीगंज मार्ग जैसे व्यस्त क्षेत्रों में पुराने पुलों के समानांतर नए पुल बनाए जा रहे हैं।

  • शिप्रा नदी के 29 किमी क्षेत्र में नए घाट: श्रद्धालुओं को सुरक्षित व सुगम स्नान की सुविधा देने के लिए ₹778 करोड़ की लागत से 29 किलोमीटर के दायरे में नए विशाल पक्के घाटों का विस्तार किया जा रहा है।

  • मार्ग चौड़ीकरण व हाईवे कनेक्टिविटी: महाकाल मंदिर, गोपाल मंदिर, सती गेट और ढाबा रोड जैसे आंतरिक शहर के मार्गों को चौड़ा किया जा रहा है। वहीं, उज्जैन को जोड़ने वाले मुख्य अंतरराज्यीय राजमार्गों को 4-लेन और 6-लेन में परिवर्तित किया जा रहा है।

  • रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेष ट्रेनें: श्रद्धालुओं की निर्बाध आवाजाही के लिए 236 विशेष ट्रेनों के संचालन का खाका तैयार किया गया है। इसके अतिरिक्त, उज्जैन और आसपास के 7 रेलवे स्टेशनों का अत्याधुनिक पुनर्विकास किया जा रहा है।

इन सभी विकास परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल सिंहस्थ महाकुंभ का सफल आयोजन है, बल्कि उज्जैन के आधारभूत ढांचे को दीर्घकालिक रूप से मजबूत कर धार्मिक पर्यटन को नई गति देना है।