उज्जैन के महाकाल मंदिर ने रचा इतिहास, आय ने पार किया 142 करोड़ का आंकड़ा

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उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर बड़ी सुर्खियों में है। इस बार चर्चा का कारण श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के साथ-साथ मंदिर समिति की रिकॉर्डतोड़ कमाई है। इस वित्तीय वर्ष में महाकाल मंदिर समिति की कुल आय 142 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो कि मंदिर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस भारी-भरकम आय का सबसे मुख्य जरिया भक्तों द्वारा दिया गया दान और विश्व प्रसिद्ध 'लड्डू प्रसादी' की रिकॉर्ड बिक्री रही है।

'महाकाल लोक' के बाद 4 गुना बढ़े श्रद्धालु

साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भव्य 'श्री महाकाल लोक' के लोकार्पण के बाद से ही उज्जैन आने वाले भक्तों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है। मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक:

  • पहले जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर रोज करीब 2 लाख तक पहुंच गई है।

  • महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और भगवान महाकाल की शाही सवारी जैसे विशेष व पावन अवसरों पर यह संख्या 6 से 7 लाख को भी पार कर जाती है। श्रद्धालुओं की इसी बढ़ती आमद ने मंदिर के आर्थिक और प्रबंधकीय ढांचे को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

कमाई का गणित: दान और लड्डू प्रसादी की धूम

मंदिर की कुल 142 करोड़ रुपये की आय को अगर बारीकी से समझें, तो इसका विभाजन कुछ इस प्रकार है:

  • कुल दान (Donation): ₹78 करोड़ (विभिन्न माध्यमों से)

    • दान पेटियां (Hundi): करीब ₹62 करोड़

    • नकद काउंटर (Cash Counter): ₹5.5 करोड़

    • ऑनलाइन माध्यम (Digital/Online): ₹3.6 करोड़

    • गुप्त दान (Anonymous Donation): ₹4.65 करोड़

    • अन्न क्षेत्र दान (Free Kitchen Fund): ₹3.38 करोड़

  • लड्डू प्रसादी बिक्री (Prasad Sale): ₹65 करोड़

इसके अलावा, देश-विदेश से आने वाले भक्तों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना और चांदी भी बाबा महाकाल के चरणों में अर्पित किया गया है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु प्रसादी के रूप में बड़ी मात्रा में शुद्ध घी के लड्डू अपने साथ ले जा रहे हैं, जिससे प्रसादी काउंटर की आय में भारी बढ़ोतरी हुई है।

खर्च और प्रबंधन: प्रति माह ₹5 करोड़ से अधिक का व्यय

आय बढ़ने के साथ ही मंदिर की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने का खर्च भी तेजी से बढ़ा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार:

  • वर्तमान में मंदिर परिसर की व्यवस्था संभालने के लिए करीब 306 नियमित और संविदा कर्मचारी चौबीसों घंटे कार्यरत हैं, जिनके वेतन (सैलरी) पर एक बड़ी राशि खर्च होती है।

  • इसके अतिरिक्त, सुरक्षा व्यवस्था, अत्याधुनिक साफ-सफाई, मंदिर के रखरखाव और वीआईपी व सामान्य श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर लगातार निवेश किया जा रहा है।

  • इस समय मंदिर का औसतन मासिक खर्च 5 करोड़ रुपये से अधिक चल रहा है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला नया बूस्ट

आर्थिक विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि महाकाल मंदिर का यह रिकॉर्ड केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे उज्जैन शहर की किस्मत बदल दी है। धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) में आए इस उफान के कारण स्थानीय होटल इंडस्ट्री, लॉज, ट्रैवल एजेंसियां, हस्तशिल्प और पूजा-सामग्री बेचने वाले छोटे-बड़े व्यापारियों के कारोबार में जबरदस्त तेजी आई है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुलभ और हाईटेक बनाने की तैयारी में जुटा है।