‘इरादे मजबूत हों तो मंजिल मिलती है’— हिमांशु सोनी बने डिप्टी कलेक्टर, पहले दिन से जनता की सेवा में जुटे

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जबलपुरमानव जीवन में कई बार ऐसे अद्भुत पल आते हैं जब इंसान अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और कभी न टूटने वाली लगन के दम पर नामुमकिन दिखने वाले लक्ष्यों को भी मुट्ठी में कर लेता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु सोनी ने अपनी शारीरिक अक्षमताओं और तमाम बड़ी बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए डिप्टी कलेक्टर के प्रतिष्ठित पद पर शानदार सफलता हासिल की है और समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है। यह सफलता सिर्फ एक युवा की व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उन तमाम जरूरतमंदों और संघर्षरत युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा है जो विपरीत हालात में भी अपने हौसलों को जिंदा रखते हैं। हिमांशु की यह कहानी साफ बयां करती है कि अटूट आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम ही किसी भी मुकाम को हासिल करने का एकमात्र जरिया है।

जबलपुर कलेक्ट्रेट में की पहले दिन की जॉइनिंग, जनसुनवाई में लिए प्रशासनिक अनुभव

अपने नए और जिम्मेदारी भरे प्रशासनिक सफर की औपचारिक शुरुआत करते हुए, हिमांशु सोनी ने जबलपुर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर अपने पद पर कार्यभार ग्रहण किया। उनके और उनके परिवार के लिए यह बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक पल था। ऑफिस ज्वाइन करने के पहले ही दिन उन्होंने जिलाधिकारी (कलेक्टर) राघवेंद्र सिंह के साथ बैठकर आधिकारिक जनसुनवाई कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने आम जनता की समस्याओं को बहुत बारीकी से और संवेदनशीलता के साथ समझा। इस दौरान उनके सामने बिजली, ऊर्जा, शिक्षा और अन्य विभागों से जुड़ी कई शिकायतें आईं, जिन्हें उन्होंने ध्यान से सुना। प्रशासनिक कामकाज को नजदीक से देखने और समझने का यह पहला अनुभव उनके आने वाले प्रशासनिक करियर के लिए एक मजबूत नींव साबित होगा।

बिना किसी महंगी कोचिंग के घर पर ही ऑनलाइन पढ़ाई कर तय किया सफलता का सफर

अपनी इस प्रेरणादायक सफलता के पीछे के संघर्षों को साझा करते हुए हिमांशु ने बताया कि उनकी सिविल सेवा की यह तैयारी किसी भी बड़े या महंगे भौतिक कोचिंग संस्थान पर आधारित नहीं थी। उन्होंने अपने घर पर रहकर ही इंटरनेट और विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों का स्मार्ट तरीके से उपयोग किया और अपनी पढ़ाई को बिना किसी बाधा के निरंतर जारी रखा। यह इस बात का प्रमाण है कि आज के आधुनिक दौर में यदि सही दिशा में व्यक्तिगत लगन हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्यों को पाया जा सकता है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अपना साक्षात्कार (इंटरव्यू) देने के बाद, वर्ष 2024 के चयन परिणाम में उनका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ। इस लंबी और कठिन यात्रा में उनके माता-पिता और परिजनों ने हर कदम पर उनका संबल बढ़ाया। किताबें जुटाने से लेकर ऑनलाइन कोर्सेस की व्यवस्था करने तक, परिवार का हर संभव सहयोग उनकी इस जीत की असली ताकत बना।

पिता ने जताई खुशी, कहा— बेटे ने हर चुनौती को पार कर रोशन किया नाम

हिमांशु की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उनके पिता, महेंद्र सोनी ने बेहद गर्व और प्रसन्नता का अनुभव करते हुए इसे अपने जीवन का सबसे सुखद दिन बताया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने तमाम शारीरिक चुनौतियों और मुश्किलों का सामना जिस धैर्य और साहस के साथ किया, उसी का परिणाम है कि आज उसने यह मुकाम हासिल किया है। युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके पिता ने एक बेहद खूबसूरत कविता साझा की:

“ख्वाहिशों से नहीं गिरते फूल झोली में, कर्म की साख को हिलाना होगा, कुछ नहीं होगा अंधेरों को कोसने से, अपने हिस्से का दिया खुद ही जलाना होगा।”

यह पंक्तियां साबित करती हैं कि जीवन में हाथ पर हाथ धरे बैठने से कुछ नहीं होता, बल्कि खुद मेहनत की मशाल जलानी पड़ती है।

युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने डिप्टी कलेक्टर हिमांशु सोनी

आज की युवा पीढ़ी के लिए हिमांशु सोनी का संदेश बेहद स्पष्ट और सकारात्मक है। उनका कहना है कि जीवन में मिलने वाली असफलताओं से कभी भी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि हर असफलता असल में सफलता की ओर बढ़ने वाली एक सीढ़ी होती है। लगातार अभ्यास और अपनी मेहनत पर अटूट विश्वास रखना ही सफलता की चाबी है। जबलपुर के युवा हिमांशु की यह सफलता यात्रा यह साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी शारीरिक या परिस्थितिजन्य चुनौती इंसान के सपनों से बड़ी नहीं हो सकती।