एनडीआरएफ ने नाविकों को सिखाए डूबते लोगों को बचाने के तरीके

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वाराणसी। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 11वीं वाहिनी के कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट के नेतृत्व में वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर स्थानीय नाविकों के लिए जीवन रक्षक कौशल एवं डूबने से बचाव विषय पर एक विशेष सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में डूबने की संभावित घटनाओं और अन्य जल जनित आपात स्थितियों के दौरान नाविकों की प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना तथा उन्हें बचाव की आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित करना था।

विभिन्न बचाव तकनीकों और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान एनडीआरएफ के प्रशिक्षित जवानों ने नाविकों को तैराक व गैर-तैराक व्यक्तियों के सुरक्षित रेस्क्यू, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय और रस्सियों के सही इस्तेमाल के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। इसके अलावा, आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों की मदद से अस्थायी तैरने वाले उपकरण और स्ट्रेचर तैयार करने के तरीके भी सिखाए गए। शिविर में डूबने से प्रभावित व्यक्ति को तुरंत राहत देने के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR), रक्तस्राव नियंत्रण और सर्पदंश जैसी आकस्मिक स्थितियों में अपनाए जाने वाले प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, नाविकों को मौसम की सटीक जानकारी और आकाशीय बिजली की पूर्व चेतावनी के लिए 'दामिनी ऐप' तथा अन्य आपदा अलर्ट के वास्ते 'सचेत ऐप' के उपयोग से भी अवगत कराया गया।

प्रमाण पत्र और सुरक्षा सामग्री का वितरण

इस जागरूकता अभियान से कुल 200 स्थानीय नाविक लाभान्वित हुए, जिन्हें गंगा घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट और वाराणसी के उप जिलाधिकारी (सदर) ने संयुक्त रूप से सभी प्रतिभागी नाविकों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र, टी-शर्ट और खाद्य सामग्री वितरित की। एनडीआरएफ की यह पहल स्थानीय समुदाय को आपदा प्रबंधन में सक्षम बनाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है।