अब दूर नहीं जाना पड़ेगा इलाज के लिए, हर 10 किमी पर सरकारी अस्पताल की तैयारी

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जयपुर। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भजनलाल सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। अब प्रदेश के गांवों और दूरदराज की ढाणियों में रहने वाले नागरिकों को प्राथमिक उपचार के लिए मीलों दूर नहीं जाना पड़ेगा। क्योंकि सरकार हर 10 किलोमीटर के दायरे में 600 नए सब-सेन्टर (छोटे स्वास्थ्य केंद्र) स्थापित करने जा रही है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर इस योजना की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की।

पंचायत चुनावों से पहले बड़ा प्रशासनिक कदम

राजनीतिक हलकों में इस पहल को आगामी पंचायती राज चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्रामीण मतदाताओं और जमीनी स्तर के आम जनमानस को सीधे प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य सेक्टर में इस कवायद के जरिए सरकार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि गांवों का विकास और बुनियादी चिकित्सा ढांचा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

50 हजार नई नियुक्तियों के बाद धरातल पर एक्शन

यह योजना केवल कागजी घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पुख्ता प्रशासनिक तैयारी है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न संवर्गों के लगभग 50 हजार पदों पर नई नियुक्तियां की जा चुकी हैं। सरकार का मुख्य जोर अब इन चिकित्सा कर्मियों को कागजी आंकड़ों के बजाय इलाकों की वास्तविक जरूरत और मरीजों के भार के आधार पर तैनात करने पर है।

हर 10 किलोमीटर के दायरे में मिलेंगी ये सुविधाएं

  • 600 नए सब-सेन्टर: भारत सरकार के सहयोग से खुलने वाले ये केंद्र ग्रामीण स्तर पर छोटे अस्पतालों के रूप में काम करेंगे।

  • विशेष जरूरत वाले केंद्र: ट्रोमा सेंटर, प्रसव सुविधा वाले केंद्र और दूरदराज के अस्पतालों में विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती होगी।

  • सुरक्षा और पारदर्शिता: आगामी तीन महीनों के भीतर सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि कामकाज की नियमित मॉनिटरिंग की जा सके।

क्या होते हैं सब-सेन्टर?

सब-सेन्टर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की सबसे शुरुआती और जमीनी इकाई होते हैं। यहाँ प्रशिक्षित एएनएम (ANM) और स्वास्थ्य कार्यकर्ता तैनात रहते हैं। इन केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, बच्चों के टीके और सामान्य बीमारियों के लिए मुफ्त प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं। हर 10 किलोमीटर पर इनके खुलने से ग्रामीणों को छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

प्रशासनिक कसावट और भविष्य की तैयारी

स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरयूएचएस के माध्यम से हजारों चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दिसंबर में होने वाली परीक्षाओं से महकमा और मजबूत होगा। इसके साथ ही। जिन केंद्रों के नए भवन तैयार हो चुके हैं। वहां तत्काल प्रभाव से सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आम जनता को बिना किसी देरी के इसका लाभ मिल सके।