कन्हैया लाल केस में पांच आरोपियों को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने जमानत ठुकराई

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जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड में शामिल पाँच प्रमुख आरोपियों की जमानत याचिकाएं पूरी तरह से खारिज कर दी हैं। मुख्य न्यायाधीश संजय अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की याचिकाओं पर अपना निर्णय सुनाते हुए इस पूरे अपराध की भीषण गंभीरता का विशेष उल्लेख किया। अदालत ने महात्मा गांधी के महान विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि आतंकवाद और धोखेबाजी कभी भी ताकतवर लोगों के हथियार नहीं होते, बल्कि यह हमेशा कमजोर लोगों के हथियार होते हैं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस जघन्य आपराधिक साजिश और आतंकी घटना की भयंकर विभीषिका को देखते हुए कोई भी आरोपी जमानत पाने का अधिकारी नहीं है।

कठोर न्यायिक टिप्पणी: आतंकवाद केवल शारीरिक हमला नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर चोट

सुनवाई के दौरान न्यायालय की पीठ ने अत्यंत कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई अपराध किसी एक व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के बजाय सीधे तौर पर राष्ट्र की अंतरात्मा पर आघात करता है, तो जमानत दिए जाने का पूरा कानूनी आधार ही बदल जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद केवल एक शारीरिक हमला भर नहीं है, बल्कि यह देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर की गई एक सोची-समझी और योजनाबद्ध चोट है। इसका मूल उद्देश्य केवल किसी एक आपराधिक घटना को अंजाम देना नहीं होता, बल्कि समाज में शांति भंग करना और कानून के स्थापित शासन को भय के साये में तब्दील करना होता है।

न्यायाधीशों ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायाधीश का आसन एक भारी और अदृश्य जिम्मेदारी के भार से बंधा होता है। यह भार देश के प्रत्येक साधारण नागरिक के उन मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का है जो भारत के संविधान के अंतर्गत निहित हैं। इस दौरान पीठ ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की सहिष्णुता पर रचित एक कविता का सुंदर उल्लेख भी किया। अदालत के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा पेश की गई सामग्री पहली नजर में इन सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोपों की पुष्टि करने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त आधार प्रदान करती है।

क्या है कन्हैया लाल हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम?

उदयपुर शहर में 28 जून 2022 को दो व्यक्तियों, मोहम्मद रियाज अटारी और गौस मोहम्मद ने एक ग्राहक के रूप में आकर कन्हैया लाल तेली की उनकी ही दुकान के भीतर निर्मम हत्या कर दी थी। इस दिल दहला देने वाली घटना के पीछे मुख्य कारण कन्हैया लाल द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट थी, जिसे उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट किया था। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मामले की विस्तृत और गहन जांच पूरी करते हुए 22 अगस्त 2022 को अदालत में अपना आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके पश्चात, विशेष अदालत ने वर्ष 2024 की शुरुआत में सभी आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे। अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही ये पाँचों आरोपी लगातार जेल में बंद हैं। इससे पहले, एक विशेष सत्र अदालत ने भी वर्ष 2024 के अक्टूबर और नवंबर के महीनों में इनकी जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया था।

अपराध में सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका का मामला

अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपियों की तरफ से पेश हुए अधिवक्ताओं ने मुख्य रूप से यह तर्क रखा कि 10 जून से 28 जून 2022 के बीच ऐसा कोई भी ठोस सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है जो यह साबित करे कि आरोपी मृतक की दुकान पर या उसके आसपास भी मौजूद थे। उन्होंने यह भी दलील दी कि आरोपियों ने किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप पर कोई ऐसा संदेश, वॉयस नोट या टेक्स्ट साझा नहीं किया था जिसे किसी विशिष्ट समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने या आपसी दुश्मनी को बढ़ावा देने वाला माना जा सके। बचाव पक्ष ने इस मामले के दो अन्य सह-आरोपियों फरहाद मोहम्मद और मोहम्मद जावेद को पहले मिल चुकी जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत दिए जाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी लंबी अवधि से हिरासत में हैं और मुख्य मुकदमे के निपटारे में अभी काफी समय लग सकता है।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने इन तमाम तर्कों का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि इन पाँचों आरोपियों ने इस जघन्य अपराध को अंजाम देने में अत्यंत सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका निभाई है। एजेंसी ने देश की सर्वोच्च अदालत के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत के स्तर पर अदालतों को साक्ष्यों को बहुत सूक्ष्मता से तौलने की आवश्यकता नहीं होती है। गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के कड़े प्रावधानों के तहत जमानत देने पर कानूनी रोक है, यदि उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों को सही साबित करती है।

निचली अदालत आगे बढ़ाएगी मुख्य मुकदमे की कार्यवाही

उच्च न्यायालय ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि उनकी ये तमाम टिप्पणियां केवल वर्तमान जमानत आवेदन पर निर्णय लेने के सीमित उद्देश्य से की गई हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि निचली अदालत इन टिप्पणियों से किसी भी तरह से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से मुख्य मुकदमे की सुनवाई और आगे की अदालती कार्यवाही को पूरी गति से आगे बढ़ाएगी।