नर्सिंग छात्रों का बड़ा ऐलान, 1500 रुपये स्टाइपेंड से नहीं चलेगा काम; 15 हजार की मांग

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रायपुर। प्रदेश में पदोन्नति के पदों पर की गई संविदा नियुक्तियों को निरस्त करने तथा नर्सिंग संवर्ग की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने तीन दिवसीय सांकेतिक विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। आंदोलन के प्रथम दिन गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय परिसर में संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।

संविदा नियुक्तियों का विरोध व पदोन्नति की मांग

एसोसिएशन की मुख्य मांग नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक के पदों पर की गई संविदा नियुक्तियों को तत्काल रद्द करना है। संघ ने मांग रखी है कि पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, बीएससी तथा एमएससी नर्सिंग की योग्यताधारी कर्मचारियों को वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नत किया जाए। साथ ही नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर के 22 और सहायक प्राध्यापक के 18 स्वीकृत पदों पर जल्द नियमित भर्ती व पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने की मांग उठाई गई।

वेतनमान, ग्रेड-पे और भत्तों में वृद्धि की मांग

संघ ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत नर्सिंग संवर्ग के ग्रेड-पे एवं वेतनमान में वृद्धि के प्रस्ताव को शीघ्र मंजूरी देने की मांग की है। भत्तों के तहत नर्सिंग अलाउंस को 7,200 रुपये तथा वॉशिंग अलाउंस को 1,800 रुपये प्रतिमाह करने की बात कही गई। इसके अलावा संविदा व कलेक्टर दर पर कार्यरत स्टाफ नर्सों के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने तथा रिक्त पदों पर नियमित भर्ती में इन्हें प्राथमिकता देने की मांग शामिल है।

27 वर्षों से लंबित स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

नर्सिंग विद्यार्थियों के स्टाइपेंड का मुद्दा उठाते हुए संघ ने बताया कि वर्ष 1998-99 से विद्यार्थियों को मात्र 1,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। पिछले 27 वर्षों से इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई है, इसलिए इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए।

प्रदर्शन में नियमित व संविदा कर्मचारी शामिल

तीन दिवसीय इस सांकेतिक प्रदर्शन के पहले दिन नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी स्टाफ नर्सों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।