मौत के बाद भी जिंदा ओमप्रकाश, अंगदान ने कई जिंदगियों को दी नई उम्मीद

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जयपुर: राजस्थान की राजधानी स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल में मानवता की एक मिसाल पेश करते हुए प्रदेश का 83वां कैडेवर अंगदान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुए 44 वर्षीय व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उनके परिजनों ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अंगदान करने का निर्णय लिया। इस पुनीत कार्य से न केवल तीन गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है, बल्कि यह घटना प्रदेश में अंगदान के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी प्रतीक बनकर उभरी है।

भीषण सड़क हादसा और ब्रेन डेड की स्थिति

वाटिका ग्राम के निवासी ओमप्रकाश सोनी बीते 3 मई को एक अज्ञात वाहन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने के अथक प्रयास किए, लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और अंततः 7 मई को उन्हें चिकित्सीय रूप से ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इस दुखद घड़ी में अस्पताल के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और मोहन फाउंडेशन की टीम ने परिवार को अंगदान की महत्ता समझाई, जिस पर उनकी पत्नी और भाई ने अपनी सहमति प्रदान की।

ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अंगों का सफल परिवहन

परिजनों की सहमति मिलते ही चिकित्सा प्रशासन सक्रिय हो गया और दान की गई दोनों किडनियों को बिना किसी देरी के दिल्ली स्थित संस्थान में भेजने के लिए विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। अंगों को समय रहते प्रत्यारोपण स्थल तक पहुंचाने के लिए पुलिस और प्रशासन के सहयोग से रास्तों को यातायात मुक्त रखा गया ताकि दिल्ली में प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को तुरंत नया जीवन मिल सके। वहीं, ओमप्रकाश सोनी के लीवर का प्रत्यारोपण स्वयं सवाई मानसिंह अस्पताल में ही एक जरूरतमंद मरीज के शरीर में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

राजस्थान में अंगदान का विस्तारित होता स्वरूप

प्रदेश में अंगदान के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 83 सफल कैडेवर अंगदान के माध्यम से लगभग 291 अंग और ऊतक दान किए जा चुके हैं, जिनमें किडनी, लीवर और हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल हैं। एसएमएस अस्पताल अकेले इस मुहिम में अग्रणी भूमिका निभा रहा है जहाँ अब तक 36 ऐसे संवेदनशील मामले दर्ज किए गए हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार आम जनता से अपील कर रहे हैं कि वे मृत्यु के पश्चात अंगदान का संकल्प लें ताकि अंग विफलता से जूझ रहे सैकड़ों मरीजों के जीवन को बचाया जा सके।