पार्षदों की खरीद-फरोख्त के दावे से राजस्थान में सियासी घमासान, गहलोत ने क्या कहा?

0
9

जयपुर। राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम आने के बाद नगर निगमों और पालिकाओं में बोर्ड गठन को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है।

अशोक गहलोत ने दावा किया कि निकायों में अपना बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय और विपक्षी पार्षदों को डेढ़ से ढाई करोड़ रुपये तक के प्रलोभन दिए जा रहे हैं।

"निर्दलीयों को दिए जा रहे ₹2.5 करोड़ तक के ऑफर": गहलोत

पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर सीधे प्रहार करते हुए कहा कि निकाय चुनाव में जनता का स्पष्ट जनादेश न मिलने के कारण सत्ताधारी दल अनैतिक हथकंडे अपना रहा है:

  • करोड़ों का प्रलोभन: गहलोत ने आरोप लगाया कि निर्दलीय और कांग्रेस समर्थित पार्षदों को तोड़ने के लिए 1.5 करोड़, 2 करोड़ और 2.5 करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में मंत्रियों को भी इस काम में लगाया गया है।

  • भ्रष्टाचार की चेतावनी: उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति करोड़ों रुपये खर्च करके मेयर या चेयरमैन बनेगा, तो वह बाद में जनता के पैसे से ही उसकी वसूली करेगा, जिससे स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार बढ़ेगा।

आंकड़ों का हवाला: 223 निकायों में भाजपा को बहुमत नहीं

चुनाव नतीजों के आंकड़ों को सामने रखते हुए गहलोत ने कहा कि राज्य की जनता ने भाजपा के खिलाफ जनादेश दिया है:

  • बहुमत का अभाव: प्रदेश के कुल 309 निकायों में से 223 निकायों में भाजपा स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी है।

  • वार्डों के आंकड़े: 10,244 वार्डों में से भाजपा को 6,065 वार्डों में हार का सामना करना पड़ा है। 10 नगर निगमों में से भाजपा केवल 4 में ही पूर्ण बहुमत पा सकी है।

  • दिग्गजों के गढ़ में पिछड़ी भाजपा: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में भाजपा 20 सीटों पर सिमट गई, जबकि वहां 36 निर्दलीय जीते हैं। इसके अलावा अजमेर, जोधपुर, पाली और झालावाड़ जैसे प्रमुख नेताओं के क्षेत्रों में भी भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

परिसीमन और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

अशोक गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, परिसीमन की गड़बड़ियों और प्रशासनिक दबाव पर भी सवाल उठाए:

  • गलत परिसीमन: गहलोत ने दावा किया कि भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर में महज 0.94% का अंतर है। जोधपुर और जयपुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद परिसीमन में की गई हेरफेर के कारण सीटों के गणित में विषमता आई।

  • प्रशासनिक दुरुपयोग: उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कलेक्टरों और एसडीएम पर भाजपा का बोर्ड बनाने का दबाव बना रहे हैं।

  • पुलिस की कार्रवाई: मंडावा, नीमराना, टोंक, सीकर और धौलपुर सहित कई इलाकों में निर्दलीय व कांग्रेस पार्षदों को डराने, बाड़ाबंदी वाले स्थानों पर पुलिस दबिश देने और परिजनों पर दबाव बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।