जयपुर। देश में ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के लिए लागू की गई ई-20 नीति के नफे-नुकसान को लेकर सियासत और चर्चा का दौर जारी है। जहां एक ओर वाहनों के माइलेज और इंजन क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इथेनॉल क्षेत्र में हो रही कथित धांधली के कारण महज एक महीने के भीतर चीनी के दामों में 25 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी बढ़ोतरी हो गई है।
'खा गई चीनी, पी गई तेल': कांग्रेस का बीजेपी पर तंज
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इथेनॉल के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी देश की जीडीपी खा गई और जनता त्रस्त है। खाचरियावास ने आरोप लगाया कि इथेनॉल सेक्टर में जारी भ्रष्टाचार के चलते बाजार में चीनी की दरें अचानक बढ़ गई हैं और आम जनता पर इसका सीधा वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
चीनी की कीमतें बनेंगी सरकार के पतन का कारण
खाचरियावास ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब-जब देश में चीनी के दाम अत्यधिक बढ़े हैं, तब-तब सरकारों के गिरने का इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल नीति की आड़ में चीनी के मामले पर ध्यान न देकर देश के लोगों को परेशान किया जा रहा है और यही मुद्दा मौजूदा सरकार के पतन की उल्टी गिनती साबित होगा।
सरकार ने इथेनॉल से संबंध का किया खंडन
बाजार में चीनी की कीमतें एक महीने में 25 प्रतिशत तक उछलकर 60 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई हैं। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों और आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में आई तेजी का इथेनॉल नीति से कोई सीधा संबंध नहीं है। वहीं बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का और गन्ने जैसी फसलों की बढ़ती मांग का असर कृषि और उससे जुड़े खाद्य पदार्थों की आपूर्ति व कीमतों पर देखा जा रहा है।









