लखनऊ:लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए गए एक बयान पर सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद करण भूषण सिंह ने राहुल गांधी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि एक 'अंग्रेज' को आरएसएस के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है।
राहुल गांधी ने क्या दिया था बयान?
दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'रचनात्मक कांग्रेस' के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को अपने विचार खुलकर रखने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। राहुल गांधी ने हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन समेत समाज के हर वर्ग के व्यक्ति के स्वतंत्र रूप से अपनी बात कहने के अधिकार का समर्थन किया।
सबसे चर्चा में रहे उस बयान में राहुल गांधी ने कहा कि जिस दिन देश में आरएसएस की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने या खत्म करने का प्रयास किया जाएगा, उस दिन वे खुद आरएसएस के इस अधिकार की रक्षा के लिए खड़े होंगे, क्योंकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार आरएसएस का भी उतना ही है जितना दूसरों का।
करण भूषण सिंह का राहुल पर तीखा हमला
राहुल गांधी के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद करण भूषण सिंह ने उन पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि "एक अंग्रेज को आरएसएस के बारे में बात नहीं करनी चाहिए।" करण भूषण सिंह ने आगे कहा कि यदि राहुल गांधी सच्चे अर्थों में भारतीय होते, तो उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रवादी विचारधारा और देशहित में किए जाने वाले कार्यों की पूरी जानकारी होती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर वे भारत के होते, तो भली-भांति जानते कि आरएसएस असल में क्या है।
अभिव्यक्ति की आजादी और विदेश नीति पर तंज
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने यह भी दोहराया कि कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मानना है कि हर व्यक्ति को अपने मन की बात कहने की आज़ादी है और किसी को भी दूसरे की आवाज दबाने का कोई हक नहीं है। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भारतीय लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा बताया।
इसी कार्यक्रम के मंच पर राहुल गांधी ने कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाते हुए मौजूदा प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश नीति बस यही है, वे जिसे चाहें गले लगा लेते हैं और इसी को अपनी विदेश नीति मानते हैं।









